ग्वालियर घर में बच्चे को कुछ खिलाने के बाद बार-बार उल्टियां हो रही हों तो इसे गंभीरता से लें और विशेषज्ञ को दिखाकर जांच अवश्य कराएं। जेएएच में हाल ही में दो साल का एक बच्चा आया है। परिजन के मुताबिक, पिछले 4 माह से बच्चा कुछ भी खाने के बाद उल्टियां करने लगता है। परिजन ने इंदरगढ़, दतिया और झांसी में दिखाया लेकिन कोई लाभ नहीं मिला।
डॉक्टर लक्षणों के आधार पर लिवर में सूजन, मलेरिया व इंफेक्शन जानकर उसका इलाज करते रहे। जेएएच के डॉक्टरों ने जांच में पाया कि उसके फेफड़े के पास नली में 2 सेमी का बटन सेल फंसा है। इस सेल को ईएनटी विशेषज्ञों की टीम ने एंडोस्कोपी के माध्यम से ऑपरेट कर बाहर निकाल दिया।
जालौन के रईस खान के बेटे अकरम (2) को 29 मई को जेएएच के पीडियाट्रिक विभाग में भर्ती कराया। परिजन का कहना था कि अकरम 4 माह से कुछ भी खाता है तो उल्टियां करने लगता है। उन्होंने उसे कई जगह दिखाया लेकिन लाभ नहीं मिला। डॉक्टरों ने बच्चे का चेकअप किया तो ऐसा नहीं लगा कि गले में कुछ फंसा हुआ है। उन्होंने एक्सरे सहित अन्य जांचें कराईं। एक्सरे रिपोर्ट में फेफड़े के पास अंदर की ओर आहार नली में 2 सेमी का सेल फंसा हुआ था। यह देखकर पीडियाट्रिक विशेषज्ञों ने पीडियाट्रिक सर्जन को कॉल किया लेकिन उन्होंने संसाधन की कमी की बात कहते हुए ईएनटी विशेषज्ञ को दिखाने की सलाह दी। इसके बाद अकरम खान को ईएनटी विभाग में शिफ्ट कर दिया गया। यहां ईएनटी के विभागाध्यक्ष डॉ. वीपी नार्वे ने एक्सरे व अन्य जांच रिपोर्ट देखने के बाद सेल को एंडोस्कोपी से निकालने का निर्णय लिया। डॉ. नार्वे ने 45 मिनट चले ऑपरेशन के बाद एंडोस्कोपी की मदद से उस सेल को सफलता पूर्वक बाहर निकाल लिया। अब बच्चा स्वस्थ है। डॉ. नार्वे की टीम में डॉ. दीपक परमार, डॉ. पारुल उपाध्याय, निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. आशीष माथुर, डॉ. प्रियंका शामिल थे।
सेल अंदर गलाव कर देता
बच्चों के खिलौने में उपयोग किए जाने वाले सेल में लीथियम होता है, जो हानिकारक है। यह अंदर गलाव कर देता है। अकरम के फेफड़े के पास नली में फंसे सेल में रिसाव शुरू हो गया था, सेल फट जाता तो जान को खतरा था। इसी काे ध्यान रखा गया कि कहीं उससे आहार नली को नुकसान न हो। अब बच्चा स्वस्थ है। -डॉ. वीपी नार्वे, विभागाध्यक्ष, ईएनटी, जीआरएमसी
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