ग्वालियर- रिश्वत के मामले में पहली बार दोषमुक्त होने के बाद भी पटवारी ने सबक नहीं लिया। पटवारी ने लोगों से रिश्वत लेना जारी रखा। फिर से रिश्वत की रिकार्डिंग सामने आ गई और लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया और विशेष न्यायालय में मामले की ट्रायल चली। इस बार पटवारी बच नहीं पाया। विशेष सत्र न्यायाधीश रामजी गुप्ता ने पटवारी महेन्द्र रावत को तीन साल की सजा सुना दी और 25 हजार रुपए का अर्थदंड लगा दिया।
विशेष लोक अभियोजक अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि अज्ञात गुप्ता ने अपनी पत्नी के नाम ग्राम रौरा में जमीन क्रय की थी। इस जमीन के नामांतरण के लिए पटवारी महेन्द्र रावत से संपर्क किया। पटवारी ने अज्ञात गुप्ता से एक लाख रुपए की रिश्वत मांगी। रिश्वत मांगने की बात मोबाइल में रिकार्ड कर ली। उसने लोकायुक्त पुलिस में शिकायत की कि मैं पटवारी को रिश्वत देना नहीं चाहता हूं। उसे रंगे हाथ पकड़वना चाहता हूं। पटवारी महेन्द्र रावत व अज्ञात गुप्ता के बीच जो बात हुई, उसकी रिकार्डिंग मोबाइल में थी। इस रिकार्डिंग को पंच साक्षियों के समक्ष 22 दिसंबर 2014 को कंप्यूटर में ली गई। इसके बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत केस दर्ज किया और लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विशेष न्यायालय में चालान पेश किया। विशेष न्यायालय में ट्रायल के दौरान फरियादी व अन्य गवाह अपनी गवाही से पलट गए, लेकिन रिश्वत मांगने की रिकार्डिंग के आधार पर अभियोजन की कहानी सही पाई गई और आरोपी को तीन साल की सजा के साथ-साथ 25 हजार का अर्थदंड लगाया। साथी ही गवाही पलटने पर गवाहों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
एक केस में हो चुका है दोषमुक्त
-पटवारी महेन्द्र रावत को लोकायुक्त पुलिस ने पहले भी रिश्वत के मामले में पकड़ा था, लेकिन लोकायुक्त पुलिस रिश्वत मांगने की कहानी को कोर्ट में सही साबित नहीं कर पाई थी। इस कारण उसे कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया था।
– पहली बार रिश्वत के मामले में बचने के बाद भी पटवारी ने सबक नहीं लिया और रिश्वत लेना जारी रखा। मोबाइल में रिश्वत मांगने की रिकार्डिंग होने पर वह दोषी पाया गया और उसे सजा सुनाई गई। रिकार्डिंग खुद फरियादी ने अपने मोबाइल में की थी।
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