ग्वालियर।
भीषण गर्मी के मौसम में कुत्तों के काटने के मामलों में बढ़ोत्तरी हुई है। विगत छह माह में कुत्ते 7865 लोगों को अपना शिकार बना चुके हैं। खाने-पीने की कमी के कारण कुत्ते गायों के बछड़ों को भी अपना शिकार बना रहे हैं। पशु विशेषज्ञों के अनुसार कुत्तों के काटने का सबसे बड़ा कारण गर्मी, भूख, प्यास और लोगों की मार व दुत्कार है। इन सब से परेशान होकर कुत्ता चिड़चिड़ा हो जाता है और वह लोगों पर हमला कर देता है। वहीं शहर में देखा जाए तो कुत्तों की आबादी भी 60 हजार के पार पहुंच चुकी है। मंगलवार को कुत्तों ने मुरार स्थित हाथीखाना निवासी रोशनी को मार डाला।

कुत्तों के आतंक के कारण दो और चार पहिया वाहन चालकों का निकला मुश्किल हो गया है। दो पहिया वाहन चालकों को कुत्ते सबसे ज्यादा अपना शिकार बना रहे हैं। वहीं शहर में घूमने वाली गायों के बछड़ों को भी कुत्ते अपना शिकार बना रहे हैं। पशु विशेषज्ञ डॉ. उपेन्द्र यादव के अनुसार बढ़ते तापमान और खाने-पानी की कमी के चलते कुत्ते लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि कुत्ते के शरीर में पसीना निकालने वाली गं्रथियां नहीं होती हैं। इसके कारण वह गर्मी को कम करने के लिए नालों और नालियों में बहने वाले पानी में बैठे रहते हैं। अगर पानी नहीं होता है वह पेड़ों की छांव में बैठ जाते हैं। लेकिन शहर में पेड़ और पानी दोनों की कम हैं, इसके कारण कुत्ते अपने शरीर की गर्मी को नियंत्रित नहीं कर पा रहे हैं। जिससे वह बेहद चिड़चिड़े हो रहे हैं और लोगों पर हमला कर उन्हें काट रहे हैं।
कुत्तों में नहीं होता स्वेट ग्लेंड
डॉ. उपेन्द्र यादव के अनुसार कुत्तों में स्वेट ग्लेंड गर्मी को नियंत्रित करने के लिए पसीना निकालने वाली ग्रंथी नहीं होती है। इसके कारण उनके शरीर की गर्मी अपने आप नियंत्रित नहीं हो पाती है। इसके कारण कुत्तों को गर्मी को नियंत्रित करने के लिए पानी की जरूरत होती है। लेकिन नालियां अधिकांश सूख चुकी हैं। साथ ही अगर कुत्ता नालियों में बैठ जाता है तो लोग उसे मार कर भगा देते हैं। इसके कारण कुत्तों में गर्मी बढ़ जाती है और वह चिडचिड़े हो जाते हैं।
भूख प्यास और आवास खत्म
कुत्तों के आवास अधिकांश पानी के पास होते हैं, जिनमें नाले शामिल हैं। लेकिन अब नालें भी खत्म होते जा रहे हैं। साथ ही खाने व पानी की कमी के कारण भी कुत्ते चिड़चिड़े हो रहे हैं।
इंसानों ने दुत्कारा तो दोस्त से दुश्मन बन गया कुत्ता
मुनि विहसंत सागर के अनुसार सनातन हिंदू धर्म में मान्यता है कि घर में पहली रोटी गाय के लिए और आखिरी रोटी कुत्ते के लिए निकाली जानी चाहिए। इससे कुत्ते का पेट भरता रहता है। वर्तमान में पशुओं के लिए घर के बाहर पानी रखने और घरों में कुत्ते के लिए रोटी निकालने की परंपर बंद हो गई है। इसके कारण कुत्तों का पेट नहीं भर पा रहा है। साथ ही अगर कुत्ता दरवाजे पर आ भी जाता है तो लोग उसे मारकर भगा रहे हैं। इसके कारण जो कुत्ता कभी इंसान का सबसे अच्छा दोस्त माना जाता था आज वह दुश्मन बन गया है। मुनिश्री के कहा कि हम किसी को दुत्कारें तो वह हमें प्रेम क्यों करेगा।
प्रतिदिन 200 कुत्तों की नसबंदी कराने का दावा
मदाखलत अधिकारी व पशु विशेषज्ञ गौरव परिहार के अनुसार शहर में कुत्तों की नसंबदी का कार्य तिरूपति फाउंडेशन कर रही है। यह फाउंडेशन प्रति माह 200 कुत्तों की नसबंदी कर रही है।
अधिकारी से सीधी बात
गौरव परिहार
पशु विशेषज्ञ व मदाखलत अधिकारी
सवाल- शहर में कुत्तों के काटने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, कुत्तों को पकड़ने का कार्य भी बंद है!
जवाब- सुबह 4 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक तिरूपति फाउंडेशन के लोग कुत्तों को पकड़ते हैं। इसके बाद नगर निगम का मदाखलत अमला कुत्तों को पकड़ता है। इसके साथ ही हम उन कुत्तों की देखभाल भी करते हैं जो घायल एवं बीमार होते हैं।
प्र- कुत्तों की नसबंदी का कार्य बंद क्यों है।
उ- शहर में कुत्तों की आबादी 60 हजार के पार हो चुकी है। वर्ष 2008 से 2018 तक एनिमल क्योर एवं केयर संस्था कार्य कर रही थी, उसका कार्य ठीक नहीं लगा। इसके बाद तिरूपति फाउंडेशन को कार्य सौंपा गया। अभी संस्था प्रतिमाह लगभग 200 कुत्तों की नसंबदी कर रही है। कुछ सालों बाद नसबंदी के रिजल्ट देखने को मिलेंगे।
प्र- शहर से बाहर क्यों नहीं छोड़ते पकड़कर या फिर गौशाला की तर्ज पर इन्हें अलग रखा जाए!
उ- सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि जिस स्थान से कुत्ते को पकड़ा जाएगा। नसबंदी कर उसे उसी स्थान पर वापस छोड़ा जाएगा। इसलिए हम इन्हें शहर के बाहर भी नहीं कर सकते हैं। साथ ही गाय सीधा जानवर है कुत्तों को इनके साथ बंद किया तो यह आपस में लड़कर ही मर जाएंगे
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