ग्वालियर। लेनदेन के मामले में दुष्कर्म का केस दर्ज कराने के एक मामले में अपर सत्र न्यायाधीश अशोक शर्मा ने आरोपी को बरी करते हुए कहा है कि लेनदेन के मामले में बलात्कार के कानून का दुरूपयोग करना गलत है और पुलिस को भी ऐसे मामलों की गंभीरता से जांच करनी चाहिए।
अभियोजन के अनुसार ममता (बदला हुआ नाम) ने 25 नवंबर 2015 को मुरार पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी कि मेरे पति फौज में पदस्थ हैं और हम किराए के मकान में रहते हैं। खुद का मकान बनाने के लिए प्लॉट लेना था और इसी सिलसिले में चंद्रप्रताप सिंह ऊर्फ पिंटू भदौरिया से मुलाकात हुई। इस काम के लिए चंद्रप्रताप ने मुझे 25 नवंबर 2015 को सीपी कॉलोनी में अपने घर बुलाया। लेकिन उसने मेरे साथ दुष्कर्म किया।
वहीं आरोपी चंद्रप्रताप के एडवोकेट अवधेश सिंह भदौरिया ने कोर्ट में बताया कि दोनों पक्ष के बीच प्लॉट के लिए 15 लाख रुपए के लेनदेन का मामला था और एफआईआर के बाद आरोपी ने फरियादी के पिता को 10 लाख रुपए दे भी दिए थे, जिसे फरियादिया ने मजिस्ट्रेट के सामने हुए बयान में स्वीकारा। उन्होंने कहा कि फरियादिया ने जिस जींस के पेंट को पुलिस द्वारा बरामद करना बताया है उस पेंट को फरियादी पहने नहीं थी बल्कि वो पेंट घर पर रखा था।
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