ग्वालियर-
गुना मध्य प्रदेश में सबसे चौंकाने वाला परिणाम गुना-शिवपुरी सीट पर रहा है। यहां से ज्योतिरादित्य सिंधिया की भाजपा प्रत्याशी केपी यादव से हार तय है। सिंधिया घराने का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर पहली बार सिंधिया परिवार से जुड़ा कोई प्रत्याशी हार रहा है। खास बात यह है कि जिन केपी यादव से सिंधिया हार रहे हैं वह कभी उनके समर्थक हुआ करते थे। फरवरी 2018 में मुंगावली विधानसभा उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने पर यादव भाजपा में शामिल हो गए थे। इसके पहले तक वह ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक हुआ करते थे।
सिंधिया के साथ कभी सेल्फी के लिए खड़े रहते थे केपी यादव

वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी हार स्वीकार करते हुए केपी यादव को जीत की बधाई दी।
गुना से कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हार गए हैं। उन्होंने ट्वीट कर भाजपा प्रत्याशी केपी यादव को बधाई दी है। हार स्वीकार करने के बाद ज्योतिरादित्य, सिंधिया परिवार के पहले सदस्य हो गए हैं जो चुनाव हारे। इससे पहले इस परिवार का कोई सदस्य गुना और ग्वालियर संसदीय सीट से चुनाव नहीं हारा। अगर परिवार का कोई सदस्य चुनाव नहीं भी लड़ा तो भी वही प्रत्याशी जीता, जिसे सिंधिया ने चाहा।
सिंधिया रियासत के भारत में विलय के बाद यहां राजमाता विजयराजे सिंधिया कांग्रेस में शामिल हो गईं। इंदिरा गांधी से पटरी नहीं बैठ पाने के कारण वे जनसंघ में शामिल हो गईं। समय के साथ सिंधिया परिवार राजनीतिक रूप से बंट गया। उनके बेटे माधवराव सिंधिया भाजपा छोड़कर कांग्रेस में चले गए।
यहां की राजनीति पर राजवंश भारी: गुना-शिवपुरी और ग्वालियर इन दो लोकसभा क्षेत्रों की राजनीति सिंधिया राजवंश के इर्द-गिर्द घूमती रही है। विजियाराजे सिंधिया उनके पुत्र माधवराव सिंधिया और अब ज्योतिरादित्य सिंधिया इसके केंद्र में रहे हैं। सिंधिया घराने की राजनीतिक मैदान में उतर चुनाव लड़ने की शुरुआत भी गुना से ही हुई। विजियाराजे सिंधिया, माधवराव सिंधिया और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने जीवन का पहला चुनाव यहीं से लड़ा।
पार्टी बदलकर चुनाव लड़ता रहा परिवार
गुना लोकसभा क्षेत्र से 1957 में हुए पहले चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर सिंधिया राजघराने की महारानी विजयाराजे ने पहला चुनाव लड़ा। 1971 में विजयाराजे के बेटे माधवराव सिंधिया ने भी पहला चुनाव यहीं से जनसंघ के टिकट पर लड़ा और जीता। माधवराव के निधन के बाद उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने जीवन के राजनीतिक करियर की शुरुआत 2002 में हुए उपचुनाव में यहीं से की। पिछले 4 चुनावों से इस सीट पर कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया को ही जीत मिली।
स्वतंत्रता पार्टी से लड़ीं विजयाराजे
1957 में विजयाराजे सिंधिया ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और हिंदू महासभा के विष्णुपंत देशपांडे को शिकस्त दी। 1971 में माधवराव सिंधिया ने जनसंघ के टिकट पर जीत हासिल की। 1977 के चुनाव में वह यहां से निर्दलीय लड़े और भारतीय लोकदल के गुरुबख्स सिंह को हराया। 1980 में कांग्रेस के टिकट पर यहां से जीते। इसके बाद 1984 में माधवराव सिंधिया ने ग्वालियर से चुनाव लड़ा। 1989 में विजयाराजे सिंधिया एक बार फिर यहां से लड़ीं और जीत दर्ज की। विजियाराजे के निधन के बाद माधवराव सिंधिया यहां से चुनाव लड़े और जीते।
दोनों लोकसभा क्षेत्रों से कब-कब जीता सिंधिया परिवार का सदस्य
गुना: 1957- विजयाराजे सिंधिया(कांग्रेस), 1967- विजयाराजे सिंधिया (स्वतंत्रता पार्टी), 1971- माधवराव सिंधिया (जनसंघ), 1977- माधवराव सिंधिया (निर्दलीय), 1980- माधवराव सिंधिया (कांग्रेस), 1989 से 1998 तक विजयाराजे सिंधिया (भाजपा), 1999- माधवराव सिंधिया (कांग्रेस), 2004 से 2014 तक ज्योतिरादित्य सिंधिया (कांग्रेस)।
ग्वालियर: 1962- विजियाराजे सिंधिया (कांग्रेस), 1984 से 1998 तक माधवराव सिंधिया (कांग्रेस), 2009 यशोधरा राजे सिंधिया (भाजपा)।
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