ग्वालियर-
पिछले 5 साल में ग्वालियर शहर व उससे लगे इलाके में 170 करोड़ रुपए खर्च कर 290 हेक्टेयर जमीन पर तीन महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र बसाए गए थे। मंशा दी कि यहां कारोबार शुरू होने पर 25 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। मप्र अाैद्योगिक विकास निगम (एमपी आईडीसी)ने सीतापुर, गारमेंट पार्क और हाल ही में पिपरसेवा औद्योगिक क्षेत्र तैयार किया। इन औद्योगिक क्षेत्रों में पानी की टंकी, आरसीसी सड़कें, बिजली, पानी, ड्रेनेज, पार्क अाैर प्रशासनिक भवन तैयार कर औद्योगिक यूनिट लगाने प्लॉट काटे गए। इसके बावजूद एमपी आईडीसी तीनों औद्योगिक क्षेत्रों में एक भी इंडस्ट्री चालू नहीं करा सका।
इस मामले में क्षेत्र के जन प्रतिनिधि भी उद्यमियों को लाने और अंचल में औद्योगिक निवेश का माहौल तैयार कर पाने में नाकाम रहे। इस प्रकार मालनपुर और बानमोर औद्योगिक क्षेत्रों में तेजी से बंद होते उद्योगों और नए औद्योगिक क्षेत्रों में इंडस्ट्री के न आने से ग्वालियर में रोजगार की उम्मीदों को तगड़ा झटका लगा है। दिलचस्प बात यह है कि पिछले 2 साल में विभाग के चीफ जनरल मैनेजर दिनेश श्रीवास्तव और निर्माण शाखा के बीच किसी तरह का कोई कम्यूनिकेशन न होने के कारण भी इन औद्योगिक क्षेत्रों में नए निवेश को लाने में दिक्कतें सामने आई हैं।
Rs.20 करोड़ खर्च हुए गारमेंट पार्क विकसित करने में
अगर अफसर मंशा दिखाएं तो अंचल के 25 हजार लोगों को मिल सकेगा रोजगार
हजीरा थाने के पास स्थित तैयार गारमेंट पार्क।
गारमेंट पार्क
10 हेक्टेयर जमीन पर 20 करोड़ खर्च कर 254 छोटे-बड़े प्लॉट काटे गए। शुरू में कुछ कारोबारियों ने प्लॉट बुक किए, लेकिन बाद में उन्हें सरेंडर कर दिया। कारोबारियों की मांग है कि यहां जमीन का रेट 4100 से घटाकर Rs.3 हजार वर्गफीट किया जाए, विकास शुल्क भी घटाया जाए। किश्तों में पैसा देने, बिजली, निर्माण आदि की परमिशन एमपी आईडीसी द्वारा देने सहित कुछ अन्य मांगे भी रखी हैं। एमपी आईडीसी ने इस संबंध में एक प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा है।
तीनों औद्योगिक क्षेत्रों का कुछ ऐसा है हाल
Rs.100 करोड़ खर्च हुए सीतापुर औद्योगिक क्षेत्र को बसाने में
सीतापुर औद्योगिक क्षेत्र
शहर से 27 किमी दूर बानमोर से आगे सीतापुर औद्योगिक क्षेत्र तैयार किया है। कुल 200 हेक्टेयर जमीन पर 100 करोड़ की लागत से यहां नए उद्योगों के लिए जरूरी हर सुविधा जुटाई गई है। यहां पर एमपी आईडीसी ने जयपुर की मयूर यूनीकॉर्टस कंपनी को उद्योग लगाने जरूर जमीन बेची है। लेकिन मयूर यूनीकॉर्टस ने अभी तक यहां उद्योग लगाकर प्रोडक्शन शुरू नहीं किया। इसके अतिरिक्त कुछ बड़ी उद्यमियों से संपर्क के दावे विभाग के अफसर कर रहे हैं। लेकिन आया कोई नहीं।
Rs.50 करोड़ खर्च हुए पिपरसेवा औद्योगिक क्षेत्र के निर्माण में
ये हैं औद्योगिक क्षेत्र में कारोबारियों के नहीं आने के 3 प्रमुख कारण
 एमपी आईडीसी का सेल्स विभाग और निर्माण विभाग के बीच कोई तालमेल इन 5 सालों में नहीं रहा। एक तरफा निर्माण चलता रहा, लेकिन सेल्स विभाग निवेशक नहीं ला पाया।
 सेल्स विभाग अपनी ओर से उद्यमियों को लाने अलग-अलग सेक्टर के कारोबारियों से संपर्क व कम्यूनिकेशन बना पाने में नाकाम रहा। अगर कोई कारोबारी खुद ही इनसे संपर्क कर ले तो उसका बैकअप लेने तक का कोई प्लान या रिकॉर्ड विभाग के पास नहीं है।
विभाग के एमडी ने स्वीकार किया सिस्टम ठप, इसलिए नाकाम
औद्योगिक क्षेत्रों में कारोबारियों को लाने की दिशा में काम शुरू
 पिछले 2 साल से विभाग के एमपीआईडीसी ने एमडी का पद भी रिक्त था। जिसके कारण भी कारोबारियों सतत संपर्क की कोशिशें नहीं हो सकीं।
पिपरसेवा औद्योगिक क्षेत्र
पिपरसेवा औद्योगिक क्षेत्र शनिचरा मंदिर से 10 किमी. पहले पड़ता है। यहां 80 हेक्टेयर जमीन पर 50 करोड़ रुपए की लागत से सभी सुविधाएं जुटाई गईं हैं। यहां 500 वर्गमीटर से लेकर 5 हजार वर्गमीटर तक के प्लॉट काटे गए हैं। इसे ओपन फॉर ऑल किया गया है। यानी हर सेक्टर के उद्योग यहां लाए जा सकते हैं। विभाग के अफसर बताते हैं कि उन्होंने पत्थर कारोबारियों से यहां उद्योग लगाने संपर्क किया है। उन्होंने भी सकारात्मक संकेत दिए हैं। लेकिन अभी तक आया कोई नहीं है।
क्योंकि… जिम्मेदार अफसरों के पास न तो कारोबारियों का कोई रिकॉर्ड है और न प्लान
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