ग्वालियर-दतिया पुलिस के दो चेहरे सामने आए हैं। इसमें एक मामले में जहां एक महिला को जहां कुछ पुलिसकर्मियों ने मौत के मुंह में धकेल दिया वहीं कुछ पुलिसकर्मियों की सक्रियता से महिला की जान बचाई जा सकी।
मामले के अनुसार ग्राम जुझारपुर निवासी सुमन पटवा जब शुक्रवार दोपहर अपने घर के बाहर बैठी थी, तभी किसी बात को लेकर उसकी परिजनों ने मारपीट कर दी। इससे आक्रोशित सुमन पति ब्रजकिशोर, जेठ और जेठानी के ऊपर मामला दर्ज कराने के लिए सीधे धीरपुरा थाने पहुंच गई। इधर, परिजनों को उसके थाने पहुंचने की जानकारी हुई, तो वो वहां भी पहुंच गए और धमकी दी कि अगर रिपोर्ट लिखा कर घर आई तो मारकर फेंक देंगे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इस दौरान वहां बैठे दीवानजी मूकदर्शक बने रहे, किसी को टोका तक नहीं। महिला की सुनवाई नही हुई, तो वह अपनी 16 साल की बेटी सोनम और 8 साल के बेटे अंकित को मामा के यहां चलने की कहकर वहां से चली आई। थाने से निकलने के बाद वह मामा के यहां जाने की बजाय रास्ता बदलकर हड़ा पहाड़ स्थित रेलवे ट्रैक पर जान देने पहुंच गई।
बेटी के पास मोबाइल फोन था, इसलिए उसने डायल 100 को कॉल कर दिया। लेकिन ट्रैक की लोकेशन नहीं बता सकी। इधर, डायल 100 के कर्मचारी घटनास्थल से लगभग एक किलोमीटर दूर पहुंच गए और सुमन को बचा लिया। गनीमत रही कि इस बीच ट्रेन नहीं गुजरी।
मारपीट से घायल सुमन को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है। एएसपी मंजीत सिंह चावला ने जानकारी मिलने पर एसआई बंदना शाक्य को अस्पताल भेजा और थाने के दीवान को एसपी डी कल्याण चक्रवर्ती ने निलंबित कर दिया। मामले की जांच दतिया एसडीओपी को सौंपी गई है।
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