ग्वालियर-
शहर में पड़ रही भीषण गर्मी से बिजली कंपनी के पावर ट्रांसफार्मर, वितरण व लाइनों को ‘बुखार’ आने लगा है। क्योंकि पिछले साल की तुलना में इस साल बिजली खपत में 25 फीसदी का इजाफा हुआ है। सोमवार को 53 लाख यूनिट की खपत हुई। खपत में बढ़ोतरी होने से लाइनें ओवरलोड हो गइर्। इससे ट्रांसफार्मर व लाइनें गर्म होने लगी हैं। इससे शहर में ट्रिपिंग बढ़ गई है। साथ ही पावर ट्रांसफार्मर के तापमान को कम करने के लिए कूलर व पंखे की जरूरत पड़ने लगी है।
प्रदेश में बिजली कटौती को लेकर काफी हल्ला मचा हुआ है। इसको लेकर ऊर्जा मंत्रालय के अपर मुख्य सचिव सहित बड़े अधिकारी निगरानी कर रहे हैं। अगर फीडर पर लंबे समय तक आपूर्ति बंद होती है तो भोपाल से फोन आने शुरू हो जाते हैं और अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांग लिया जाता है। इस वजह से शहर में अघोषित रूप से कटौती नहीं कर पा रहे हैं। अधिकतम तापमान में वृद्धि हो रही है। 33 केवी 11 केवी लाइन सहित पावर ट्रांसफार्मर पर लगातार लोड बढ़ रहा है। 102 छोटे व बड़े पावर ट्रांसफार्मर कमजोर भी हो गए गए हैं। इससे ये लोड सहन नहीं कर पा रहे हैं। इनका तापमान बढ़ रहा है। तापमान व बिजली खपत में वृद्धि लगातार जारी रही तो सिस्टम को चलाना मुश्किल हो जाएगा।

क्यों आता है बुखार
– जब भी किसी ट्रांसफार्मर का तामपान बढ़ता है तो कंपनी के इंजीनियर उसे सामान्य भाषा में कहते हैं कि उसे बुखार आ रहा है। जैसे कि किसी व्यक्ति को बुखार आता है तो उससे शरीर का तापमान बढ़ता है। तापमान को कम करने के लिए दवाइयां लेनी पड़ती हैं। ट्रांसफार्मर का भी तापमान बढ़ता है। जब बढ़ने लगता है तो पंखे व कूलर लगाने होते हैं।
– एक पावर ट्रांसफार्मर बाहर का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस व अंदर का 45 डिग्री सेल्सियस सहन कर सकता है। अंदर व बाहर का 90 डिग्री सेल्सियस तामपान सहन करने की क्षमता ट्रांसफार्मर की होती है। इससे ऊपर जाता है तो उसके लिए खरतनाक हो जाता है। 86 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान का तापमान ट्रांसफार्मर के लिए सामान्य होता है।
पिछले साल 43 लाख यूनिट की हुई थी खपत
-अप्रैल 2018 में अधिकतम लोड 42 से 43 लाख यूनिट बिजली की खपत थी। अघोषित रूप से बिजली कटौती करके लोड को स्थिर कर लिया था, लेकिन इस साल 28 व 29 अप्रैल को खपत 53 लाख यूनिट के करीब बनी हुई है। पिछले साल की तुलना में 25 फीसदी अधिक है।
– अगर तापमान ऊपर और जाता है तो खपत में बढ़ोतरी की संभावना है। जितनी खपत बढ़ेगी, उतनी ही बिजली आपको सताएगी।
बारिश व आंधी आई तो झेलना पड़ेगा ब्लैक आऊट
– 33 केवी व 11 के लाइनों पर क्षमता से 30 से 40 फीसदी लोड अधिक चल रहा है। इंसुलेटर व तार काफी गर्म है। अगर आंधी के साथ बारिश आती है तो यह बर्स्ट हो जाएगा। ऐसी स्थिति में लोड डायवर्ट करने की भी व्यवस्था नहीं है। क्योंकि हर फीडर पहले ही ओवर लोड है। वह दूसरे फीडर का लोड सहन करने करने की स्थिति में नहीं है।
– पिछले साल लगातार लोड बढ़ने से तार टूटने की घटना अधिक हुई थीं। क्योंकि गर्म होने की वजह से तार पिघल रहे थे। इससे टूट रहे थे। तारों की स्थिति ऐसी बनने लगी है। क्योंकि 33 केवी लाइनों पर 300 एम्पीयर से अधिक लोड है।
फैक्ट फाइल
सब स्टेशन-53
-फीडर-208
– उपभोक्ता-2.56 लाख
– फीडर पर औसत बंद- 4 से 5 बार
इनका कहना है
25 फीसदी ज्यादा खपत
– अप्रैल 2018 की तुलना में इस वर्ष 25 फीसदी बिजली ज्यादा खपत है। 53 लाख यूनिट की सप्लाई की गई है। वर्तमान में लाइनों पर फुल लोड चल रहा है।
नितिन मांगलिक, महाप्रबंधक सिटी सर्कल
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