भोपाल। आयुष्मान भारत योजना के तहत अब संतानहीनता (इंफर्टिलिटी), किडनी ट्रांसप्लांट को भी इसमें शामिल कर लिया है। यह बीमारियां गरीब मरीजों के लिए चल रही राज्य बीमारी सहायता निधि योजना में शामिल थी। 31 मार्च से राज्य बीमारी सहायता निधि बंद हो गई है।
इसके पहले ही इन योजनाओं को आयुष्मान भारत योजना में शामिल कर लिया है। एप्लास्टिक एनीमिया का इलाज भी अब ‘आयुष्मान” योजना में मिलेगा।
आयुष्मान भारत योजना प्रदेश में सितंबर 2018 से चल रही है। शुरू में इसमें भारत सरकार द्वारा तय 1350 बीमारियां शामिल थीं। इसके बाद किडनी ट्रांसप्लांट, संतानहीनता समेत कुछ बीमारियों को जोड़ने के बाद 1399 बीमारियां हो गई हैं।
संतानहीनता को तीन साल पहले राज्य बीमारी सहायता निधि में शामिल किया गया था। इसके तहत नि:संतान महिलाओं का चिन्हित निजी अस्पतालों में इलाज कराया जाता था। अब आयुष्मान योजना के तहत चिन्हित अस्पतालों में महिलाओं का इलाज किया जाएगा।
सरकारी क्षेत्र में कोई आईवीएफ सेंटर नहीं होने की वजह से संतानहीनता के ज्यादातर पैकेज निजी अस्पतालों के लिए रिजर्व किए गए हैं। इसी तरह से एप्लास्टिक एनीमिया के मरीजों का इलाज भी आयुष्मान भारत योजना के तहत किया जाएगा। यह राज्य बीमारी सहायता निधि व भारत सरकार द्वारा तय आयुष्मान योजना के पैकेज में भी नहीं थी। इस बीमारी में मरीज में खून की कमी बनी रहती है।
वहीं, कंजेनाइटल पायरोलिक स्टोनोसिस को भी आयुष्मान में शामिल किया गया है। यह जन्मजात बीमारी है। इसमें खाना आंतों तक नहीं पहुंच पाता, जिससे बच्चे को उल्टी होने लगती है। सर्जरी से इसका इलाज किया जाता है।
किडनी ट्रांसप्लांट के मरीजों को जेब से नहीं लगाना होगा पैसा
राज्य बीमारी सहायता निधि के तहत किडनी ट्रांसप्लांट के लिए संबंधित अस्पताल को 2 लाख रुपए मिलते थे। निजी अस्पतालों में ट्रांसप्लांट का खर्च करीब 4 लाख रुपए लगता था। लिहाजा मरीजों को अतिरिक्त राशि अपने पास से खर्च करना पड़ती थी। अब आयुष्मान में शामिल होने के बाद मरीज को पूरा इलाज कैशलेस मिलेगा।
पैकेज बढ़ाया है
संतानहीनता को आयुष्मान भारत योजना में शामिल किया गया है। किडनी ट्रांसप्लांट पहले राज्य बीमारी सहायता में शामिल थी, पर अब उसका पैकेज बढ़ाया गया है।
डॉ. वंदना खरे जीएम ऑपरेशन, आयुष्मान भारत योजना
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