ग्वालियर।
हाईकोर्ट की युगल पीठ में स्कूल वाहनों में हो रही ओवर लोडिंग को लेकर क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी एमपी सिंह उपस्थित हुए। आरटीओ ने कहा कि चालान के बाद वाहन चालक ओवर लोडिंग शुरू कर देते हैं। ओवर लोडिंग को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। लेकिन कोई भी स्कूल संचालक सहयोग नहीं करता है। कोर्ट ने कहा कि आदेश का पालन कराना आपका काम है। अगर कोई चालक आदेश का पालन नहीं करता है तो उसे जेल क्यों नहीं भेजते हैं। अन्यथा आप दंड भुगतने के लिए तैयार रहें। सुनवाई के लिए समय कम होने की वजह से कोर्ट ने 11 अप्रैल को फिर से आरटीओ को स्पष्टीकरण के साथ बुलाया है।
अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया ने स्कूल वाहनों में हो रही ओवर लोडिंग को लेकर अवमानना याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि वर्ष 2012 में स्कूल वाहनों में हो रही ओवर लोडिंग को लेकर जनहित याचिका दायर की गई थी। ऑटो में सीट के समानांतर लकड़ी का फट्टा लगा लिया। इस पर बच्चों को बिठाया जाता है। ड्राइवर की सीट पर दोनों ओर बच्चे बिठाए जा रहे हैं। 12 से 15 बच्चे ऑटो व वैन में बिठाए जा रहे हैं। 10 अक्टूबर 2012 को हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि स्कूल वाहनों में ओवर लोडिंग रोकी जाए। क्षमता बढाने के लिए लगाए लकड़ी के फट्टों को हटाया जाए। संख्या से अधिक बच्चे बिठाने वालों ड्राइवरों के लाइसेंस निरस्त किए जाएं। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वाहनों की औचक जांच करें और पुलिस व परिवहन विभाग के अधिकारी भी कार्रवाई कर ओवर लोडिंग रोकें। अधिवक्ता भदौरिया ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद ओवर लोडिंग रोकने की जिम्मेदारी नहीं ले रहे हैं। आरटीओ कहते हैं कि पर्याप्त स्टाफ नहीं है। जबकि पुलिस चालान काटने के अलावा कोई कार्रवाई नहीं करती है। कोर्ट ने गत दिवस हुई सुनवाई के दौरान कहा था कि आप लोगों ने अखबार नहीं पढ़े हैं। 1 अप्रैल को स्कूल का पहला दिन था। पहले दिन ओवर लोड की चिंताजनक खबरें प्रकाशित हुई हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी बच्चे सुरक्षित नहीं दिख रहे हैं। कोर्ट ने स्पष्टीकरण के लिए बुलाया था। आरटीओ स्पष्टीकरण देने के लिए उपस्थित हुए थे। आरटीओ ने कहा कि ऑटो व वैन में होने वाले बच्चों के परिवहन को रोकने में कोई सहयोग नहीं कर रहा है।
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