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छह माह की सजा भुगतने के बादजुर्माना भरने के लिए नहीं थे 50 रुपए, जेल अधीक्षक ने भरी राशि, तब हुआ रिहा

ग्वालियर- राजकुमार पंजाबी उर्फ भिंडी को चाकू लेकर घूमने पर छह माह के कारावास के साथ 50 रुपये का जुर्माना हुआ था। बुधवार को बंदी की सजा अवधि पूरी हो गई थी। जुर्माना भरने की व्यवस्था नहीं होने पर उसे दो दिन और जेल में रहना था। लेकिन छह माह की सजा भुगतने के बाद से जेल से बाहर निकलने के लिए छटपटा रहा था। संयोग से बुधवार को विधिक सहायता की टीम भी जेल पहुंची थी। बंदी ने अपनी समस्या इस टीम के सदस्य समाजसेवी एमएल अरोरा को बताई।
 
एमएल अरोरा ने जेल अधीक्षक मनोज साहू के पास जाकर अपनी जेब से बंदी का जुर्माना भरने का अनुरोध किया। लेकिन जब जेल अधीक्षक को यह पता चला तो उन्होंने कहा कि जेल में बंदी के अभिभावक अधिकारी होते हैं। इसलिए उन्होंने अपनी जेब से 50 रुपये जुर्माना भरकर बंदी को रिहा किया।
 
 
रामदास घाटी के पास रहने वाले राजकुमार उर्फ भिंडी पुत्र बदन सिंह पंजाबी को चाकू लेकर घूमते हुए पकड़ा था। पुुलिस ने धारा 25बी आर्म्स एक्ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर चालान न्यायालय में पेश किया। आरोप सिद्ध होने पर कोर्ट ने बंदी राजकुमार पंजाबी को छह माह के कारवास के साथ 50 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नही भरने पर दो दिन और सजा बढ़ सकती थी।
 
26 मार्च को सजा पूरी हुई
 
बंदी राजकुमार पंजाबी ने एक-एक दिन गिनकर छह माह की सजा काट ली। बुधवार को उसकी रिहाई होनी थी। जब उसे मालूम पड़ा कि 50 रुपये का जुर्माना नहीं भरने के कारण उसकी रिहाई अटक गई है। तो वह उदास हो गया। इसी बीच विधिक सहायता समिति के सदस्य एमएल अरोरा जेल पहुंचे। बंदी ने उन्हें अपनी समस्या बताई और रिहा कराने के अनुरोध किया। समाज सेवी एमएल अरोरा ने दो माह पहले भी एक बंदी का 500 रुपये का जुर्माना भरकर उसे रिहा कराया था।
 
50 रुपये का जुर्माना भरा
 
 
 
हां- एक बंदी के पास न्यायालय के आदेश के अनुसार 50 रुपये का जुर्माना भरने के लिए पैसे नहीं होने के कारण उसकी रिहाई अटक गई थी। लेकिन यह बात समाजसेवी एमएल अरोरा के माध्यम से उनके संज्ञान में आने पर उसका जुर्माना भरकर रिहा किया गया।
 
मनोज साहू, जेल अधीक्षक
 
 
नहीं थे, जुर्माना भरने 50 रुपए
 
प्रति सप्ताह कोर्ट के आदेश से बंदियों को विधिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए जाते हैं। एक बंदी उदास घूम रहा था। उसने बताया कि 50 रुपए जुर्माना भरना है। इसलिए उसकी रिहाई अटक गई। यह बात जेल अधीक्षक की संज्ञान में लाने पर उसका जुर्माना भरा गया। उसके बाद बंदी की रिहाई हुई।
 
-एमएल अरोरा, समाजसेवी
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