ग्वालियर /उज्जैन- ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में भविष्य निधि जमा कराने को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। मंदिर प्रशासन ने अप्रैल 2009 से फरवरी 2016 के बीच कई कर्मचारियों की भविष्य निधि ही जमा नहीं कराई। मनमाने तरीके से इन्हें अपात्र करार दे दिया गया।

बीते दिनों भविष्य निधि संगठन के अफसरों ने जांच की तो मामला सामने आया। इसके बाद मंदिर प्रशासन को राशि जमा कराने का आदेश दिया गया था। हालांकि समिति ने कर्मचारी हित में राशि जमा नहीं की। इसके बाद बुधवार को संगठन के अफसरों ने मंदिर का बैंक खाता अटैच किया और रुपए की वसूली की।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के प्रवर्तन अधिकारी हेमंत नागराज ने बताया कि वर्ष 2009 से 2016 के बीच महाकाल मंदिर में कार्यरत कई पात्र कर्मचारियों को भी भविष्य निधि का लाभ नहीं दिया गया। बीते दिनों जब दस्तावेजों की जांच की गई तो इसका खुलासा हुआ।
कर्मचारियों की यह राशि 98 लाख 67 हजार 620 रुपए है। सहायक भविष्य निधिआयुक्त विजयसिंह ठाकुर ने मंदिर समिति को आदेश दिया था कि उक्त राशि कर्मचारियों की है। इसलिए उनके भविष्यनिधि खातों में जमा करने के लिए संगठन को सौंपी जाए। हालांकि इसका पालन नहीं किया गया।
इस पर मंदिर के भारतीय स्टेट बैंक की बुधवारिया शाखा में स्थित खाते को अटैच करने की कार्रवाई शुरू की गई, जिसके बाद संगठन को चेक के माध्यम से राशि सौंपी गई। यह राशि संबंधित कर्मचारियों के खातों में जमा कराई जाएगी।
राशि जमा होने पर अप्रैल 2019 में कई कर्मचारी पेंशन के लिए भी पात्र हो जाएंगे। कार्रवाई भविष्य निधि आयुक्त सुखबीर सिंह, सहायक आयुक्त विजयसिंह ठाकुर के मार्गदर्शन में नागराज व अनुभाग अधिकारी सुभाष पगारे द्वारा की गई।
मंदिर समिति के जिम्मेदारों ने ध्यान ही नहीं दिया
जानकारी अनुसार मंदिर समिति के अफसरों ने पूर्व में इन कर्मचारियों को पीएफ का लाभ दिलाने के प्रति ध्यान ही नहीं दिया। इस कारण यह स्थिति बनी और इतनी बड़ी रकम बकाया हो गई। मामले की जानकारी कलेक्टर तक भी पहुंची है। इसे लेकर मंदिर प्रशासन पर गाज गिर सकती है।
सूत्र बताते हैं कि भविष्य निधि के अफसरों ने जब पीएफ नहीं काटे जाने को लेकर मंदिर समिति के अधिकारियों से सवाल किए तो उन्होंने कहा कर्मचारी पात्र थे ही नहीं। 2016 के बाद से इन्हें लाभ दिया जा रहा है। करीब 150 कर्मचारी लाभान्वित होंगे।
इनका कहना
संबंधित कर्मचारियों को सेवादार के रूप में रखा गया था, इसलिए इन्हें उस समय पात्र नहीं माना था। इस कारण यह स्थिति बनी।
– चंद्रशेखर जोशी, सहायक प्रशासक, महाकाल मंदिर समिति
loading...
बढ़ता कारवाँ | समाजवाद की ओर बढ़ते कदम… India's #1 Leading News Portal