ग्वालियर-
खान-पान में बदलाव और प्रदूषित वातावरण का प्रभाव लोगों की आंख पर दिखाई देने लगा है। पहले 60 साल की उम्र के बाद मोतियाबिंद होता था अब यह 40 साल के बाद ही नजर आने लगा है। मोबाइल का ज्यादा प्रयोग, लैपटॉप, कम्प्यूटर के सामने अधिक देर तक बैठना भी इसका एक कारण है।
यह बात पद्यश्री पुरस्कार प्राप्त डॉ. पीएस हार्डिया नेइंदौरमें, नि:शुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर में बताई। उन्होंने एक ही दिन में 500 से अधिक मरीजों की जांच व इलाज किया।

यह है आंखों को स्वस्थ रखने के उपाय
– सड़क के किनारे बिकने वाले सस्ते रंग-बिरंगे चश्मों को नहीं लगाएं।
– मोबाइल, लैपटॉप आदि का इस्तेमाल कम से कम करें।
– दिन में 6 बार आंखों को बंद कर पानी से मुंह धोएं।
– आंखों में जोर-जोर से पानी के छींटे नहीं मारें।
– प्रदूषित पानी से धोने से आंखें खराब हो सकती हैं।
– प्रदूषण से भी आंख के लाल होने, पानी आने या सूखने की समस्या हो सकती है। इसलिए प्रदूषित माहौल से दूर रहें।
– कॉन्टेक्ट लेंस का उपयोग नहीं करें।
लोगों को मिली नई जानकारियां
शिविर में पहुंचे 25 वर्षीय राहुल द्विवेदी ने बताया कि उन्हें आंख से पानी आता है। जांच के बाद पता चला कि यह मोबाइल और लैपटॉप के ज्यादा इस्तेमाल से हुआ है। 53 वर्षीय गीता चौहान को एक आंख से कम दिखाई देता था। जांच के बाद उन्हें मोतियाबिंद होने की जानकारी लगी। अब तक उन्हें लगता था कि यह बीमारी बहुत ज्यादा उम्र में होती है। मुझे यह इतनी जल्दी हो जाएगी, इसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी। 16 वर्षीय मोहन कुमार को दूर की चीजें धुंधली दिखाई देती थीं। जांच करने के बाद उन्हें अपने चश्मे का नंबर पता लगा।
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