ग्वालियर- डबरा बिलौआ में पकड़ा गया फर्जी रॉयल्टी रसीद बनाने का मामला भोपाल तक पहुंच गया है। माइनिंग विभाग के प्रमुख सचिव ने खुद इस मामले की जांच के लिए भोपाल से एक टीम ग्वालियर भेजी। जिससे यह पता लगाया जा सके कि आखिर ई-रॉयल्टी की फर्जी रसीदें तैयार कैसें की जा रही थीं। साथ ही आईटी एक्सपर्ट खुद सॉफ्टवेयर की खामी पता लगाएंगे। इसके लिए आईटी एक्सपर्ट ने सोमवार को फर्जी रसीद, ढाबे से बरामद लैपटॉप में बने फॉरमेट की पड़ताल की। बिलौआ थाने से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित गंगा ढाबे पर एसडीएम जयति सिंह और एसडीओपी देवेन्द्र सिंह कुशवाह ने छापा मारकर फर्जी रॉयल्टी रसीदें पकड़ी थी। यहां फर्जी रॉयल्टी रसीदें तैयार की जा रही थी। यहां से स्कैनर, लैपटॉप, प्रिंटर, कैलकुलेटर, इलेक्ट्रॉनिक कांटा, फर्जी रसीदें बरामद हुई थी। पुलिस ने ढाबा संचालक मुकेश शर्मा सहित आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया था। एसडीएम जयति सिंह ने इस मामले की जानकारी भोपाल में बैठे माइनिंग विभाग के अधिकारियों को वॉट्सएप के जरिए दी थी। इसके बाद माइनिंग विभाग के प्रमुख सचिव ने इस मामले को गंभीरता से लिया। प्रमुख सचिव के निर्देश पर भोपाल से एक टीम इस मामले की जांच करने बिलौआ पहुंची। एसडीएम जयति सिंह ने पूरे मामले की जानकारी दी और फर्जी रसीदें दिखाईं। माइनिंग विभाग का सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी के आईटी एक्सपर्ट किशन शर्मा भी पहुंचे। उन्होंने पूरे मामले को समझा। इसके बाद अब वह खुद पता लगाएंगे कि आखिर रॉयल्टी रसीदों के फाॅरमेट फर्जीवाड़ा करने वालों के पास कैसे पहुंचे। ढाबे पर मिले लैपटॉप की भी पड़ताल उन्होंने की।
अब क्यूआर कोड और एसएमएस से भी पता लगाया जा सकेगा, रॉयल्टी की रसीद असली है या नकली*
एसडीएम जयति सिंह ने बताया कि यह फर्जीवाड़ा पकड़े जाने के बाद अब पूरे सॉफ्टवेयर में सुधार के लिए आईटी एक्सपर्ट ग्वालियर आए। अब क्यूआर कोड और एसएमएस की नई व्यवस्था की जाएगी। ऑरिजिनल रसीद पर क्यूआर कोड की व्यवस्था के लिए सॉफ्टवेयर में सुधार किया जाएगा। क्यूआर कोड और एसएमएस से रसीद की हकीकत पता लगाई जा सकेगी। इससे सीधे पोर्टल पर रसीद चेक करने की जरुरत नहीं पड़ेगी। नाकों पर क्यूआर कोड जांचने के लिए व्यवस्था की जाएगी।
बड़ा सवाल: नाकों पर क्यों नहीं पकड़ी गई फर्जी रसीदें…
बिलौआ में माइनिंग विभाग का नाका है। यहां माइनिंग विभाग द्वारा चेकिंग लगाई जाती है। लेकिन नाकों पर फर्जी रसीदें नहीं पकड़ी गई। इससे माइनिंग विभाग की मिलीभगत की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
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