ग्वालियर-
चिकित्सा शिक्षा विभाग ने दवाओं का रिकॉर्ड ऑनलाइन कर दिया है। जिसमें प्रदेश में सबसे अधिक दवाएं जीआर मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जयारोग्य अस्पताल में दिखाई दे रही हैं। इसके बाद भी सबसे ज्यादा दवाओं को लेकर हंगामा जेएएच में हो रहा है। डॉक्टर बाहर से दवाओं की पर्ची लिख रहे हैं। ऐसे में रिकॉर्ड में गड़बड़ी है या जानबूझकर संकट पैदा किया जा रहा है यह जानने के लिए जेएएच अधीक्षक खुद सरदार वल्लभ भाई पटेल निशुल्क औषधि केन्द्र पर पहुंचे। हालांकिदवाएं बंटती हुई दिखाई दीं, मरीजों की तरफ से भी अधिक शिकायत नहीं मिली।
जयारोग्य अस्पताल में पिछले करीब 2 माह से दवाओं को लेकर संकट की स्थिति बनी हुई है। विधायक से लेकर संभागायुक्त तक इसको लेकर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। मंगलवार को तो करीब 100-150 मरीजों ने सेन्ट्रल दवा स्टोर पर दवाएं नहीं मिलने पर हंगामा भी किया है। नईदुनिया ने जब एमपीपीएचसीएल की वेबसाइट पर जाकर दवाओं की हकीकत जानने का प्रयास किया तो पता चला कि प्रदेश में सबसे अधिक दवा जेएएच के स्टोर में है। जेएएच के सेन्ट्रल दवा स्टोर में करीब 330 प्रकार की दवाएं हैं, जबकि सरदार वल्लभ भाई पटेल निशुल्क औषधि केन्द्र में 224 प्रकार की दवाएं हैं। जबकि अन्य मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध किसी भी अस्पताल में 200 दवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।
फिर क्यों हो रहा दवाओं को लेकर हंगामाः
जेएएच प्रबंधन भी इसी उलझन में है कि सबसे अधिक दवाएं होने के बाद भी आखिर जेएएच में दवाओं को लेकर इतना हंगामा क्यों हो रहा है। आखिर क्यों डॉक्टर पर्ची पर बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। जबकि डॉक्टरों को हिदायत दी गई है कि वह सादा पर्ची पर कोई भी बाहर ही दवाएं नहीं लिखेंगे। इसके बाद भी पर्ची चल रही है। हालांकि सभी डॉक्टरों के पास दवाओं की सूची पहुंचा दी गई है।
अधीक्षक पहुंचे दवा स्टोर पर, देखी व्यवस्थाः
जयारोग्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक मिश्रा ने बुधवार को सुबह 11ः30 बजे माधव डिस्पेंसरी में सरदार वल्लभ भाई पटेल निशुल्क औषधि केन्द्र में पहुंचकर जांच पड़ताल की। इसके अलावा अन्य जगह ड्रग डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर की भी जांच की है। हालांकि सभी जगह दवाओं को लेकर किसी मरीज ने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है। वहीं मानव अधिकार आयोग की टीम ने भी जेएएच का निरीक्षण किया है। उनको भी किसी मरीज ने किसी प्रकार की अव्यवस्था को लेकर कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है।
डॉक्टरों की डिमांड से संशय की स्थितिः
अस्पताल में ऑनलाइन दवाएं उपलब्ध दिखाई दे रही हैं, जबकि डॉक्टरों की डिमांड से संशय की स्थिति बन रही है। बुधवार को सेन्ट्रल मेडिकल स्टोर के अधिकारिक वाट्सएप ग्रुप पर एक डॉक्टर ने एटोरीकोक्सिब, ट्रेमाडोल, पैरासिटामोल, कैमोट्रेप्सिन, नोट्रीपटायलिन, प्रेगाबायलिन की डिमांड की है। जबकि एक डॉक्टर पोप बैंडेज की डिमांड प्लास्टर रूम के लिए की है। ऐसे में ऑनलाइन दवाओं के रिकॉर्ड पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। क्योंकि यदि दवाएं हैं तो फिर डिमांड क्यों करना पड़ रही है।
किस मेडिकल कॉलेज में कितनी दवाएं:
कॉलेज सेन्ट्रल दवा स्टोर सरदार वल्लभ भाई पटेल स्टोर
जीआर मेडिकल कॉलेज 330 224
एमवाय इंदौर 215 103
जबलपुर मेडिकल कॉलेज 337 181
रीवा मेडिकल कॉलेज 282 97
सागर 331 139
इनकी सुने
हमारे पास पर्याप्त दवाएं हैं, किसी प्रकार की दिक्कत नहीं है। हमने बुधवार को ड्रग डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर का भी जायजा लिया है, कहीं कोई शिकायत नहीं मिली है। डॉक्टर जो दवाएं भेज रहे हैं, वह एडवांस डिमांड है। जिससे दवाएं खत्म होने से पहले ही मंगा ली जाएं।
डॉ. अशोक मिश्रा, अधीक्षक जेएएच
loading...
बढ़ता कारवाँ | समाजवाद की ओर बढ़ते कदम… India's #1 Leading News Portal