ग्वालियर- ग्वालियर व्यापार मेला स्थित फेसिलिटेशन सेंटर में सैलानियों की काफी भीड़-भाड़ बनी हुई थी। सबकी आंखों में एक इंतजार था, अपने प्रिय कवि से रूबरू होने का। यह इंतजार जब मुस्कुराहट में बदल गया, जब देश के प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास मंच पर आए। मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में आयोजित काव्य संध्या में कुमार विश्वास ने जहां एक ओर अपनी कविताओं से श्रोताओं का दिल जीत लिया। वहीं उन्होंने मौजूदा हालातों पर भी चुटकी ली।
मोहब्बत के साथ सियासत और सियासतदारों की बात भी की, जिसने उनके चाहने वालों को हंसने और ठहाके लगाने पर भी मजबूर कर दिया। उन्होंने श्रोताओं से रूबरू होते हुए खुद पर बात करते हुए कहा-आजकल भाजपा वाले मेरे पास बहुत आते हैं, उन्हें पता है नारियल चटका है टूटेगा जरूर। यह सुनकर श्रोता खुद को हंसने से नहीं रोक पाए। इसके बाद अपनी वह प्रसिद्ध कविता सुनाई, जिसे सुनने के लिए सब बेचैन थे। यह कविता थी-कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है, मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है। मैं तुझसे दूर कैसा हूं, तू मुझसे दूर कैसी है। ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है।
इस कविता के बाद श्रोताओं ने खड़े होकर उनका अभिवादन भी किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में कुमार विश्वास का स्वागत मेला अध्यक्ष संभागायुक्त बीएम शर्मा और सचिव पीसी वर्मा ने माला पहनाकर किया। इस मौके पर मुम्बई से आए दिनेश बाबरा ने भी कविता पाठ किया।
फिल्म में भी कर चुके अभिनय
कुमार विश्वास मंचीय कवि होने के साथ-साथ हिंदी सिनेमा के गीतकार हैं। वह आदित्य दत्त की फिल्म चाय गरम में भी अभिनय कर चुके हैं। स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने एमए करने के बाद कौरवी लोकगीतों में लोक चेतना विषय पर पीएचडी प्राप्त की। उनके इस शोधकार्य को वर्ष 2001 में पुरस्कृत भी किया गया।
दिल को छू गईं ये पंक्तिय
मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है। कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है। यहां सब लोग कहते हैं मेरी आंखों में आंसू है। जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है। समंदर पीर का अन्दर है, लेकिन रो नहीं सकता। यह आंसू प्यार का मोती है, इसको खो नहीं सकता । मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना, मगर सुन ले। जो मेरा हो नही पाया, वो तेरा हो नही सकता ।।
सुनाईं ये कविताएं
सरकार से जुड़ी ये बात
– देश बनाएं या फिर अपने बेटे की लाश ढोएं, ये बात दिल्ली वाले कब समझेंगे, कुत्ता पागल हो जाए तो गोली मारी जाए।।
शहीदों को दी सलामी
– मर जाएंगे तुम मिलो तो सही, कि दीप ऐसे बुझे कि फिर जले ही नहीं।।
चंबल पर ली चुटकी
– चुबल की पुलिस अकेली ऐसी पुलिस है, जिसने मरा मराया निर्भय भी दो बार मारा।
युवा को लेकर कही ये बात
– मेरे मन में जले हर दिए की कसम आज तक जो किया, उस किए की कसम मैं जहां आस लिए रोज बैठा रहा, लौट आओ उसी हासिए की तरफ।
अटलजी को समर्पित
– नेता टेलीविजन से नही विजन से बनता है…।
भाजपा
-भाजपा नेताओं ने बोला कमल पर वोट दो, लोगों ने कमलनाथ पर लगा दी मोहर।
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