ग्वालियर-
बड़ी अजीब स्थिति है, 108 एम्बुलेंस कंडम है। इसमें दवाएं, उपकरण कुछ भी नहीं है। सीएमएचओ से बात की तो वह पल्ला झाड़ रहे हैं, आप बोल रहे हैं कि सीएमएचओ की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी है। आखिर क्या मजाक बना रखा है। अपने सीएमएचओ को कर्तव्य सिखाओ। 108 एम्बुलेंस शहर की लाइफ लाइन है, यदि गाड़ी में कोई जीवन रक्षक उपकरण दवाएं एवं उपकरण नहीं होंगे तो क्या फायदा।
यह बात विधायक प्रवीण पाठक ने जयारोग्य अस्पताल में 108 एम्बुलेंस की जांच के बाद फोन पर संयुक्त संचालक डॉ एके दीक्षित से कही। दरअसल कैजुअल्टी एवं ट्रामा सेंटर के निरीक्षण के बाद अस्पताल परिसर में खड़ी 108 एम्बुलेंस पर विधायक की नजर पड़ी। जब जांच की तो पता चला कि उसमें जीवन रक्षक दवाएं, मॉनिटर यहां तक हाथ धोने का पानी तक नहीं था। बीपी इंस्टूमेंट तो कभी खोला ही नहीं गया था। विधायक ने जब नोडल ऑफिसर डॉ आईपी निवारिया को फोन लगाया तो वह भी कोई सही जवाब नहीं दे सके, इस पर तत्काल जेएएच आने के निर्देश दिए। सीएमएचओ एवं संयुक्त संचालक एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे, जिससे विधायक ने नाराजगी जाहिर की। हालांकि बाद में संयुक्त संचालक ने बताया कि जिस एम्बुलेंस की जांच की गई है, वह कंडम घोषित हो चुकी है। नए वाहन का आर्डर दिया जा चुका है
परसो 5, कल 8 और आज 10 हजार बता रहे खर्चाः
कैजुअल्टी में भर्ती रवि कुमार निवासी हजीरा ने विधायक को बताया कि उसके पैर की तीन हड्डी फैक्चर हुई है। गरीबी रेखा का कार्ड नहीं है, परसो तक डॉक्टर 5 हजार का खर्चा बता रहे थे। कल मुझे 8 हजार बताया और अब आज 10 हजार खर्चा बताया है। मैं गरीब आदमी इतना पैसा कहां से लाऊं। इस पर विधायक ने जब डॉक्टर से पूछा तो बताया कि गरीबी रेखा कार्ड धारक के लिए निशुल्क है, जबकि आम आदमी को इम्प्लांट का खर्च खुद वहन करना होता है। विधायक ने कहा कि जितनी मदद आप कर सकें कर दें, बाकी मुझसे लें ले, लेकिन ऑपरेशन हो जाना चाहिए।
पर्ची लिखकर दी, कहां होगी जांचः
कैजुअल्टी में भर्ती सोहेल नाम के मरीज के परिजनों को डॉक्टर ने जांच के लिए पर्ची थमां दी। जिसमें निजी लैब का एड्रेस लिखा हुआ था, वहीं पर जांच कराने को कहा गया था। विधायक से जब शिकायत हुई तो पता चला कि दांत का एक्सरे होना है, लेकिन अस्पताल में फिल्म नहीं है। विधायक ने कहा कि अभी आप फिल्म बाजार से खरीदकर एक्सरे करवा लो, मैं वचन देता हूं कि अब किसी को ऐसी परेशानी नहीं झेलना पड़ेगी।
बेसमेंट में करो अटेण्डेंट की व्यवस्थाः
विधायक के साथ एमआईटीएस के प्रोफेसर आलोक शर्मा भी आए थे। ट्रामा सेंटर के बेसमेंट में खाली जगह देख पहले बेड डालने या डायग्नोस्टिक सेंटर बनाने का विचार किया गया। जब डॉक्टरों ने बताया कि यहां पानी भर जाता है तो विचार बदल दिया गया। यहां पर अटेण्डेंट के लिए स्थान उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। जिससे लोग यहां आराम कर सकें। इस दौरान ट्रामा सेंटर में भर्ती मरीजों के स्वास्थ्य लाभ की जानकारी भी ली।
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