ग्वालियर- रेलवे और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अफसरों के बीच न तालमेल है और न ही किसी तरह का कम्यूनिकेशन। इसके कारण ग्वालियर बायपास के टूटे पुल के पुर्ननिर्माण के लिए रेलवे से मिलने वाले ब्लॉक को लेकर पिछले 2 महीने से कोई निर्णय नहीं हो पा रहा है। झांसी मंडल में सिर्फ बैठकें हो रही हैं। नतीजा कुछ नहीं निकल रहा है।
एनएच के प्रोजेक्ट डायरेक्टर खुद इस बात को स्वीकार करते हैं कि रेलवे के अफसर शुरू से कुछ भी स्पष्ट नहीं करते हैं और एेन वक्त पर वे निर्माण की तैयारियों को लेकर नाखुशी जता देते हैं। लेकिन एनएच के अफसर खुद भी अपनी ओर से रेलवे के अफसरों से बात करने की कोई कोशिश नहीं करते। पिछले 2 महीने में सिर्फ 1 बार ही एनएच और रेलवे अफसर इस मुद्दे को लेकर एक साथ बैठक कर पाए हैं। अधिकतर बैठकें निर्माण कंपनी एरा कंस्ट्रक्शन के प्रोजेक्ट मैनेजर और रेलवे के सेक्शन इंजीनियर लेवल के अधिकारियों के बीच हुई हैं।
दस बैठत हो चुकी हैं: निर्माण कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर देवी सिंह पटौदी और रेलवे के इंजीनियरों के बीच करीब 10 बैठकें बीते 2 माह में हुई हैं। प्रोजेक्ट मैनेजर द्वारा ब्लॉक के लिए दिए गए हर प्लान को रेलवे इंजीनियर खारिज करते हैं और फिर नया प्लान बनाने के निर्देश दे देते हैं। पहले ब्लॉक का समय 16 घंटे से हटाकर 11 घंटे करा दिया। फिर दिन भी 11 से घटाकर 7 कराए। इसके बाद एक समय में ब्लॉक की अवधि भी 70 मिनट से घटाकर 40 मिनट करने का प्लान बनवाया। अब गर्डर लांच कराने बिंच मशीन मंगवाने के निर्देश रेलवे इंजीनियरों ने निर्माण कंपनी को दिए हैं। सवाल यह है कि क्या यह निर्णय एक या दो बार की बैठकों में नहीं लिए जा सकते थे।
दो की हो चुकी है मौत: रेलवे, एनएच और निर्माण कंपनी की इस नूराकुश्ती में परेशान ग्वालियर की आम जनता हो रही है। ग्वालियर बायपास के 5 हजार वाहनों का पूरा लोड रायरू, पुरानी छावनी, मल्लगढ़ा, गोले का मंदिर, पिंटो पार्क, डीडी नगर, महाराजपुरा होते हुए हाईवे पर निकल पा रहा है। भारी वाहनों के शहर के इन भीतरी मार्गों से आने के कारण अब तक दो लोग दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं।
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