ग्वालियर-
महिलाओं को भी थाना पुलिस से ज्यादा हेल्पलाइन पर भरोसा है। यही कारण है कि कुल शिकायतों में से 54 शिकायतें सिर्फ कोचिंग सेंटर, स्कूल व ऑफिस से जुड़ी महिलाओं की हैं।
शहरवासियों के मन में थाना पुलिस की क्या छवि है यह किसी से छुपी नहीं है। यही कारण है कि एसपी ग्वालियर के हेल्पलाइन वॉट्सएप ग्रुप पर बीते 8 महीने में 600 शिकायतें आ चुकी हैं। इतना ही नहीं महिलाओं का विश्वास इसलिए भी है कि इन 54 शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई कर शिकायत का निराकरण किया गया है। साथ ही महिलाओं की पहचान को गोपनीय भी रखा गया है। लेकिन लोगों ने इस हेल्पलाइन ग्रुप को भी नहीं छोड़ा पड़ोसी से रंजिश निकालने या किसी को फंसाने के लिए फर्जी शिकायतें भी काफी सामने आई हैं। जिसमें कार्रवाई के दौरान पुलिस का समय व संसाधन दोनों खराब हुए हैं।
8 महीने में 600 शिकायतें
मई 2018 में एसपी ग्वालियर का चार्ज संभालते ही नवनीत भसीन ने शहर के लोगों से सीधे जुड़ते हुए पुलिस हेल्पलाइन वॉट्सएप नंबर जारी किया। साथ ही यह प्रचारित किया गया कि इस हेल्पलाइन वॉट्सएप ग्रुप पर लोग अपने आसपास होने वाली असामाजिक गतिविधियों के संबंध में बेखौफ शिकायत कर सकते हैं। उनकी पहचान को गोपनीय रखते हुए तत्काल एक्शन लिया जाएगा। शुरुआत के एक दो महीने में कुछ ही शिकायतें आईं, लेकिन शिकायतों पर तत्काल रिस्पोंस मिलने पर हेल्पलाइन पर शिकायतें तेजी से बढ़ना शुरू हो गईं। 8 महीने में 600 के लगभग शिकायतें आ चुकी हैं। मतलब हर माह 75 से 80 शिकायतें हेल्पलाइन पर आ रही हैं।
अवैध शराब कारोबार, महिलाओं से बदसलूकी की शिकायत ज्यादा
पुलिस हेल्पलाइन पर कुल शिकायतों में से सबसे ज्यादा 90 शिकायतें अवैध शराब से जुड़े कारोबार से हैं। जबकि दूसरे नंबर पर 54 शिकायतें महिलाओं से जुड़ी सामने आई हैं। इसके अलावा आपसी झगड़े, सट्टा व जुए के अड्डों की खबरों का नंबर है। 80 फीसदी मामलों में पुलिस ने तत्काल एक्शन लेकर कार्रवाई की है।
200 शिकायतें दूसरे विभागों की
कुल शिकायतों में से 200 शिकायतें ऐसी हैं जो पुलिस विभाग की न होकर अन्य विभागों की हैं। जैसे सीवर ओवरफ्लो होना। समय पर पानी न आना। कचरा न उठाना और बिना वजह बिजली कटौती आदि हैं। इन शिकायतों पर शिकायतकर्ता को संबंधित विभाग में शिकायत करने की सलाह देकर वहां के अधिकारियों के नंबर उपलब्ध कराए गए हैं।
फेक शिकायतों ने किया परेशान
ऐसा नहीं है कि पुलिस हेल्पलाइन पर लोगों ने शिकायतें ही कीं। फेक शिकायत कर लोगों ने पुलिस का समय व संसाधन की बर्बादी भी की है। कुल शिकायतों में 20 फीसदी शिकायतें ऐसी थीं। जिसमें रंजिशन पड़ोसी को परेशान करने अवैध शराब या सट्टा कारोबार की सूचना दी गई। जब पुलिस सूचना पर कार्रवाई करने पहुंची तो वहां कुछ भी ऐसा नहीं मिला।
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