ग्वालियर-
अतिरिक्त तहसीलदार नरेशचन्द्र गुप्ता को हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी भारी पड़ गई। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अतिरिक्त तहसीलदार को अवमानना का दोषी मानते हुए कहा कि इनके ऊपर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का भी केस बनता है। सब कुछ जानने के बाद भी आदेश का पालन नहीं किया जा रहा था। किसी को फायदा पहुंचा रहे थे। इसलिए उनकी भूमिका की जांच कर रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए।
कोर्ट की सख्ती के बाद अतिरिक्त तहसीलदार ने दुकान भी खाली करा ली और कब्जा भी ले लिया।
सुभाषचन्द्र अग्रवाल ने हाईकोर्ट में एक अवमानना याचिका दायर की। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता बलदेव कुमार ने तर्क दिया कि अतिरिक्त तहसीलदार कोर्ट के आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने गत दिवस अतिरिक्त तहसीलदार नरेश चन्द्र गुप्ता को तलब किया। अतिरिक्त तहसीलदार ने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश अंग्रेजी में होने की वजह से समझ में नहीं आया। इस कारण पालन करने में दिक्कत आई। इसके लिए माफ किया जाए। कोर्ट ने पूरा रिकॉर्ड अवलोकन करने के बाद कहा कि बैंक ने उन्हें कोर्ट के आदेश को हिंदी में ट्रांसलेट करके दिया था। इस मामले की उन्हें पूरी जानकारी थी, लेकिन कोर्ट को गुमराह करने के लिए इस तरह का बहाना बनाया जा रहा है। अतिरिक्त तहसीलदार ने आदेश की अवमानना भी की, लेकिन व्यक्ति विशेष को फायदा पहुंचाने की भी कोशिश की है। इसलिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (1)(डी) का केस बनता है। उनकी जांच की जाए। 28 जनवरी को अतिरिक्त तहसीलदार को फिर से बुलाया है। कोर्ट के इस आदेश के बाद अतिरिक्त तहसीलदार ने शनिवार को तत्काल कार्रवाई कर दी। दुकान को अपने कब्जे में ले लिया।
क्या है मामला
मुकेश अग्रवाल की काली माई संतर मुरार में एक दुकान है। उसने पंजाब नेशनल बैंक से कर्ज लिया था, लेकिन वह कर्ज चुकाने में नाकाम रहे। बैंक को 4 लाख 83 हजार रुपए की वसूली करनी थी। अतिरिक्त तहसीलदार को इस दुकान को नीलाम कर बैंक को पैसा अदा करना था। हाईकोर्ट ने बैंक के पक्ष में फैसला दिया था। इसके बाद केस सुप्रीम कोर्ट में चला और बैंक के पक्ष में फैसला हुआ। अतिरिक्त तहसीलदार इस दुकान पर कब्जा नहीं ले रहे थे। प्रेमचन्द्र सचदेवा इस दुकान पर कब्जा किए हुए।
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