ग्वालियर-
नगर निगम मुख्यालय भवन में दिन भर तीसरी मंजिल तक फाइलें लेकर अधिकारी और कर्मचारी दौड़ते रहे। यहां पर अपर आयुक्त के कक्ष में बैठकर नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय के अपर आयुक्त विकास मिश्रा ने अपने टीम सदस्यों के साथ जांच शुरू की। टीम इस बात पर ज्यादा ध्यान दे रही है कि केंद्र और राज्य सरकार से मिली राशि की दूसरे मद में या फिर डबल एंट्री तो नहीं की। यह जांच शनिवार को भी चलेगी। इसके बाद श्री मिश्रा अपनी रिपोर्ट आयुक्त को सौंपेंगे।
नेताओं की मल्टी को अवैध रूप से परमिशन देने हेतु नियम बदलने और पार्किंग का दुरपयोग मामला भी चर्चा में रहा
टीम साल 2015 से आज तक का रिकाॅर्ड चेक कर रही है। टीम के सदस्यों को कचरा वाहनों में लगे जीपीएस सिस्टम की ऑनलाइन मॉनीटरिंग दिखाने के लिए बंद पड़ी एलईडी चालू कर दी गई, जिस पर वाहनों का समय भी ठीक से नहीं आ रहा है।
संचालनालय के आयुक्त ने बीते दिनों अपर आयुक्त विकास मिश्रा, अधीक्षण यंत्री सुरेश सेजकर, कनिष्ठ लेखाधिकारी प्रमोद नायक की टीम बनाकर सात दिन में जांच करने के आदेश दिए थे। इसके बाद श्री मिश्रा ने रिकाॅर्ड उपलब्ध कराने के लिए अपर आयुक्त आरके श्रीवास्तव को आयुक्त से मांग लिया था। वे उनके माध्यम से ही फाइलें मंगाकर संबंधित योजनाओं के अधिकारियों से बातचीत करते रहे।
एक करोड़ के टेंडर के मामले: टीम ने नगर निगम में पिछले चार साल में कराए गए निर्माण कार्यों को मुख्य रूप से बिंदु में शामिल किया है। टीम एक करोड़ या फिर उससे ज्यादा के टेंडर जारी होने के मामलों को खास तरीके से देख रही है। कहीं कोई सिंगल टेंडर लाभ देने के लिए तो नहीं कर दिया गया।
नेता प्रतिपक्ष मिले: जांच कर रही टीम ने नेता प्रतिपक्ष कृष्णराव दीक्षित मिलने के लिए पहुंचे। उन्होंने श्री मिश्रा से आर्थिक सहायता के मामलों की पड़ताल के लिए आग्रह किया है।
रिपोर्ट आयुक्त को सौंपेंगे
इनकी मंगाई फाइलें और रिकाॅर्ड लिया
टीम के सदस्यों ने अमृत योजना, स्मार्ट सिटी योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, जनसंपर्क विभाग, डबल एंट्री, भवन निर्माण संबंधी अनुमति, वित्त आदि की फाइलों को मंगाया। उन्हें जिस कागज की जरूरत पड़ी। उसका रिकाॅर्ड अपने पास रख लिया है। टीम कुल 16 बिन्दुओं पर काम कर रही है।
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