ग्वालियर-
डबरासिविल अस्पताल में आईसीयू के लिए सांसद केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने ५० लाख दिए लेकिन अधिकारी बनने नहीं दे रहे डॉक्टरों की कमी बताई जाती मंत्रियों को तकलीफ होती तब डॉक्टर कहाँसे आ जाते डबरा के नागरिको की जान की कीमत सरकार नहीं समझती इसलिएभाजपा सरकार विरोधी माहौलबना मरीज ग्वालियर रेफरहोते, नईबनी मंत्री इमरतीदेवी से लोगों को आशा हे
डबरा में स्वास्थ्य विभाग नेअस्पताल कोउन्नत कर सिविल अस्पताल को तो बनवा दिया, लेकिन वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की पदस्थापना नहीं की गई है। मेटरनिटी वार्ड है, लेकिन स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ न होने से प्रसूताएं नर्सों के भरोसे हैं। सामान्य प्रसव नर्सें करा देती हैं और गंभीर स्थिति होने पर वे ही ग्वालियर रेफर कर देती हैं। अस्पताल में बीएमओ हैं। डॉक्टरएक-दो आए दिन अवकाश पर रहते हैं। कोई भी विशेषज्ञ डॉक्टर न होने से मरीजों का प्राथमिक उपचार ही हो पा रहा है और गंभीर स्थिति होने पर मरीज ग्वालियर रेफर करने के अलावा कोई चारा नहीं होता है। मरीज भगवान और उसके परिजन भगवान को याद करते हुए ग्वालियर रवाना होते हैं। ऐसे में कई बार मरीज की जान पर बन आती है।
क्षेत्र की जनता आस लगा रही है कि अस्पताल के हालात सुधारने के लिए नई मंत्रीजी जरूर उपाय करेगी
उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से इलाज के दौरान मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो इसके लिए उपकरण भी उपलब्ध करा दिए गए, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर अभी तक पदस्थ नहीं हो सके हैं। इस कारण मशीनें धूल खा रही है। मेडिसिन डॉक्टर और गायनोलॉजिस्ट डॉक्टर के पद पिछले चार-पांच साल से खाली हैं, उन्हें अभी तक नहीं भरा नहीं गया है।
आसपास के 250 गांव के लोग आते इलाज कराने
सिविलअस्पताल में आसपास के लगभग 250 गांवों के लोग इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं और रोजाना लगभग 200 से 250 के बीच की ओपीडी रहती है। अस्पताल में डॉक्टर नहीं होने के कारण इलाज के लिए आने वाले मरीजों को या तो बिना इलाज कराए लौटना पड़ता है या फिर किसी प्राइवेट डॉक्टर से इलाज कराना पड़ता है।
महिलाएं होती हैं परेशान
मेटरनिटी वार्ड में महिला एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने के कारण कई बार प्रसव के दौरान स्थिति अगर बिगड़ जाती है तो प्रसूता गंभीर हालत में ग्वालियर रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल में परिवार नियोजन के लिए लगने वाले एलटीटी कैंप में आने वाली महिलाओं को ऑपरेशन के लिए डॉक्टर का इंतजार करना पड़ता है, क्योंकि ऑपरेशन करने के लिए डॉक्टर ग्वालियर से आती है। अगर अस्पताल में महिला चिकित्सक पदस्थ हो जाए, तो महिलाओं को ऑपरेशन के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
नियुक्त नहीं हो सके हड्डी रोग विशेषज्ञ
अस्पताल में अस्थि रोग विशेषज्ञ नहीं होने के कारण हर महीने लगभग दो सौ मरीजों को ग्वालियर रेफर किया जाता है। अगर मामूली चोट लगने पर अगर कोई मरीज आता है तो फ्रैक्चर के आशंका के चलते ग्वालियर रेफर कर दिया जाता है। इससे मरीज को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही अस्पताल में एनेस्थिसिया के विशेषज्ञ का पद भी काफी समय से खाली पड़ा है।
अस्पताल में ये पद खाली हैं
अस्पताल में वर्तमान में मेडिसिन विशेषज्ञ, गायनोलॉजिस्ट, मेडिकल ऑफिसर, विशेषज्ञ, जनरल सर्जन, एनेस्थिसिया, आर्थोपैडिक के एक-एक पद खाली हैं। इनके अलावा एमपीडब्ल्यू के,पर्यवेक्षक के, एंबुलेंस चालक का , स्टाफ नर्स के कंपाउंडर के का पद खाली है।
किट के अभाव में नहीं हो पा रही है जांचे
स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पताल में लगभग 28 जांच कराने के लिए सुविधा उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन वर्तमान में किट नहीं होने के कारण 28 में से केवल 8 प्रकार की ही जांचे हो रही है। ग्राम आरोग्य केन्द्र उप स्वास्थ्य केन्द्र पर हीमोग्लोविन, यूरेन एल्वोनियम सुगर, यूरेन प्रेग्नेंसी, मलेरिया किट तथा पीबीएफ की जांच नहीं हो पा रही है। वहींअस्पताल में हीमोग्लोविन, माइक्रोस्कोपी यूरेन, ब्लड शुगर, सीरम यूरिया, सीरम कॉलेस्ट्रॉल, सीरम ग्लोरबिन, टाइफाइड, बीटीसीटी, स्टूल एक्जाम, ईएसआर इंफेक्शन तथा सीबीसी प्लेटलेट्स आदि के जांच में मरीज आते हैं, लेकिन किट के अभाव में जांच कम हो पा रही है। इसके साथ ही अस्पताल में प्लेटनेट काउंट, पीबीएफ फोर मलेरिया, स्पूरम एएफबी, एसजीओटी, एसजीपीटी, एएलके पोस्स, जी 6 पीडी, सीरम क्रेफिन प्रोटीन, आरए फेक्टर, एमबीएस एजी, व्हीडीआरएल तथा सीरम एनालेसिस के जांच कराने के लिए मरीज आते हैं, प्रायसभी जांचों के लिए मरीजों को प्राइवेट लैब ही जाना पड़ता है।
कुछ बाहरी तत्वहावी रहते और कुछ महिला डॉक्टर योग्यता न होते हुए भी महिलाओं को इलाज के नाम पर घर ड्यूटी टाइम में देख हजारों की वसूली कर लेजाती
अस्पताल में डॉक्टर और सुविधाएं पर्याप्त नहीं होने के कारण मरीजों को कई बार परेशान होना पड़ता है। सुविधाएं बढ़ाने और डॉक्टरों की पदस्थापना के लिए कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को प्रपोजल भेजा गया है। इस संबंध में शासन को भी कई बार अवगत कराया गया
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