ग्वालियर-
आठ साल पहले जिला मजिस्ट्रेट द्वारा नगर निगम के दिए गए अधिकारों का स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन की डेफोडिल कंपनी उपयोग कर रही है। परिवहन विभाग के मोटल व्हीक्ल एक्ट 1988 की धारा 127 के तहत निगम को नो पार्किंग से वाहन उठाकर जुर्माना लगाने का अधिकार है। लेकिन शहर में अब इस अधिकार का इस्तेमाल डेफोडिल कंपनी के नुमाइंदे कर रहे हैं। कंपनी न सिर्फ नो व्हीकल जोन में खड़े वाहनों को उठाकर अवैध तरीके से रसीदें काट रही है बल्कि निगम को जुर्माना वसूली का पैसा भी नहीं दे रही है। स्मार्ट सिटी द्वारा चयनित इस कंपनी के कारण वाहन चालक परेशान हो रहे हैं। उनके द्वारा दिए गए पैसे का कोई अकाउंट निगम के खाते में नहीं खोला गया है। हालांकि स्मार्ट सिटी के सीईओ महीप तेजस्वी का कहना है कि एमआईसी से अधिकारी ले लिए गए हैं। वहीं एमआईसी सदस्य धर्मेंद्र राणा का कहना है कि रसीद काटने और शहर से वाहन उठाने के लिए एमआईसी से स्मार्ट सिटी को कोई अधिकार नहीं दिया है।
गौरतलब है कि स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन ने डेफोडिल कंपनी को शहर में 24 स्मार्ट पार्किंग चलाने की जिम्मेदारी दी है। कंपनी को राज पाएगा, सालासर मॉल के पीछे बनी मल्टीलेवल पार्किंग सहित अन्य पार्किंग को भरने के लिए आसपास के 200 मीटर क्षेत्र से ही वाहन उठाने हैं। लेकिन कंपनी पूरे शहर से वाहन उठा रही है। जबकि स्मार्ट सिटी की तीनों मल्टी लेवल पार्किंग पूरी तरह नहीं भर पा रही हैं।
ये है व्यवस्था: साल 2011 में तत्कालीन कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट आकाश त्रिपाठी ने एक आदेश निकाला था। इसमें नगर निगम आयुक्त को प्राधिकृत किया गया था। इसके लिए अलग से अकाउंट भी खोलने को कहा गया था। यातायात पुलिस को उक्त व्यवस्था में निगम को पर्याप्त व आवश्यक सहयोग करने के आदेश हैं। साथ ही ट्रैफिक पुलिस पर उस वक्त क्रेन थी, वह भी निगम को दे दी गई थी। गौरतलब है कि उस वक्त भी एमआईसी से ऐसे कोई अधिकारी नहीं थे। जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही काम चल रहा है।
रियलिटी चेक: जहां से उठानी हैं गाड़ियां, वहां खड़ी मिलीं
यहां घूमती है गाड़ी: प्राइवेट कंपनी की टो गाड़ी (गाड़ी उठाने वाला वाहन) महाराज बाड़ा, हुजरात रोड, सराफा बाजार, कंपू आदि क्षेत्र से वाहनों को उठाकर कंपू स्थित ट्रैफिक थाने में पहुंचाती है। वाहन में बैठा स्टॉफ दो पहिया वाहनों को उतारता है। उनकी एंट्री के लिए कंपनी के कर्मचारी काम करते हैं। इसके वाहन मालिकों की रसीदों को काटा जाता है। उनसे 200 से 400 रुपए तक लिए जाते हैं।
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