ग्वालियर- प्रदेश में सत्ता बदलते ही जिला और संभागीय मुख्यालय पर कई अधिकारी चिंता में नजर आने लगे हैं। उन्हें अपने स्थानांतरण का डर सताने लगा है। सबसे ज्यादा चिंता उन अधिकारियों को है, जिन्होंने कांग्रेस नेताओं की अनदेखी की और भाजपा सरकार के इशारों पर काम किया। अधिकारी खुद ही इसका अंदाजा लगा रहे हैं, इनमें डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार, नायब तहसीलदार सहित राज्य प्रशासनिक सेवा के नए अधिकारी ज्यादा आशंकित हैं।
बिजली कम्पनी ,जनपदों तहसील नजूल लेंड रिकॉर्ड थानों अस्पतालों जिलों मेंसालों से अधिकारी जमे हैं मोतीझील बिजली कम्पनी आफिस रौशनी घर और अन्य विभाग जिनमे जनता का रोज काम पड़ता अधिकारी बदले नहीं गए
कैसे करेंगे सामना?
पिछले पांच से दस साल के बीच पदस्थ हुए अधिकारियों का कहना है कि अभी तक ज्यादातर भाजपा नेताओं की कार्यप्रणाली को देखा है। अब अधिकारी इस बात को लेकर चर्चा कर रहे हैं कि भाजपा नेता किसी काम के लिए कहने से पहले भूमिका बनाते थे, अब कांग्रेस नेता किस तरह का व्यवहार करेंगे।
इनके चेहरों पर चिंता
कई अधिकारी-कर्मचारी 15 साल से एक ही जगह घूम रहे हैं। जिले से बाहर जाने की बजाय जुगाड़ लगाकर आसपास पदस्थी कराने वाले भाजपा समर्थक अधिकारियों के चेहरों पर चिंता साफ नजर आ रही है। 2003 से अभी तक भाजपा ने अपने हिसाब से अधिकारियों को नियुक्त किया था, महत्वपूर्ण पदों पर लगातार जमे हुए ऐसे 50 से अधिक अफसरों को अब तबादले का डर है।

अधिकतर नए हैं अधिकारी
कलेक्टर अशोक वर्मा, अपर कलेक्टर दिनेश श्रीवास्तव, जिपं सीईओ शिवम वर्मा, एडीएम संदीप केरकेट्टा, उप जिला निर्वाचन अधिकारी राघवेन्द्र पांडेय, एसडीएम दिनेश चंद्र शुक्ला, केके गौर, नरोत्तम भार्गव, सीबी प्रसाद, बीबी अग्निहोत्री, जयति सिंह, अशोक चौहान सहित डिप्टी कलेक्टर दीपशिखा भगत, अश्विनी रावत, पुष्पा पुषाम के अलावा क्षेत्र के तहसीलदार, नायब तहसीलदार आचार संहिता लगने से पहले हुई सर्जरी के दौरान जिले में पदस्थ किए गए थे। इनमें से जिन अधिकारियों ने भाजपा का परोक्ष-अपरोक्ष रूप से सपोर्ट किया है, वे अधिक चिंतित हैं।
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