ग्वालियर-
सर्दी बढ़ने के साथ ही सड़कों पर धुंध की उपस्थिति दिखने लगी है। जिस कारण बीते 7 दिन में एक दर्जन से अधिक सड़क हादसों में 7 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। 90 फीसदी हादसे रात 10 बजे से सुबह 5 बजे के बीच हुए हैं। हादसों की मुख्य वजह भी धुंध में हाई स्पीड पर गाड़ी चलाना है। हादसे इसलिए भी ज्यादा हो रहे हैं कि शहर की अधिकांश सड़कों पर डिवाइडर से रिफ्लेक्टर, फुटपाथ व यू-टर्न पर ब्लिंकर तक गायब हैं। ऐसे में हल्की सी धुंध होने के बाद आने वाले मोड़ या डिवाइडर का अंदाजा नहीं रहता। ऐसे में हादसे होने की संभावना बढ़ जाती है।
7 दिन में यह हुए सड़क हादसे
– 15 दिसंबर रात 2 बजे धुंध के बीच जूनियर डॉक्टर की बाइक इंदरगंज में ट्रक से टकराई, मौत।
-14 दिसंबर रात 12 बजे अकबरपुर हाइवे पर बाइक सवार को ऑटो ने कुचला, मौत।
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-12 दिसंबर रात 1.30 बजे थाटीपुर चौराहा, हल्की धुंध में बेकाबू कार ने बाइक सवारों को कुचला।

-12 दिसंबर छतरपुर से मरीज को लेकर आ रही एम्बुलेंस हाइवे पर धुंध के कारण डिवाइडर से टकराई, मरीज की मौत, 3 घायल।
-12 दिसंबर रात 12 बजे पेट्रोल पंप कर्मचारी को हुरावली पर अज्ञात वाहन ने कुचला, मौत।
– 9 दिसंबर को बीए की छात्रा को ट्रक ने गोला का मंदिर चौराहा पर कुचला, मौत।
स्पीड बनती है हादसों की वजह
बीते सात दिन में अचानक आसमान में धुंध के बढ़ने से रात 10 बजे के बाद और सुबह 5 बजे के पहले हाइवे सहित शहर में वाहन चलाने में आम दिनों की तुलना में काफी अंतर आया है। यही वह समय होता है जब सड़कें सूनी होने पर चार पहिया वाहनों को उनके चालक बेकाबू दौड़ाते हैं। ऐसे में जरा सी चूक होने और धुंध के चलते वाहन न दिखने से हादसे होते हैं। बीते सात दिन में कई हादसों में अचानक डिवाइडर सामने आने पर वाहन की गति कन्ट्रोल नहीं कर सके और हादसे का शिकार हो गए।
शहर की सड़कों से रिफ्लेक्टर तक गायब
हादसों का एक मुख्य कारण धुंध के दौरान दृश्यता कम होना है पर इसके साथ ही अन्य कई कारण भी हैं जिन पर ध्यान होगा। जैसे धुंध में वाहन चलाने के दौरान सबसे ज्यादा मदद करते हैं डिवाइडर पर लगे रिफ्लेक्टर पर शहर की अधिकांश सड़कों पर यह है ही नहीं। जिनमें एजी ऑफिल से चेतकपुरी रोड, आकाशवाणी से थाटीपुर, थाटीपुर से मुरार रोड, सिटी सेंटर तिराहा से होटल तानसेन, भिंड रोड से गोला का मंदिर पर रिफ्लेक्टर गायब हो चुके हैं। इतना ही नहीं ब्लिंकर भी काम नहीं कर रहे हैं। साथ ही कई जगह डिवाइडर खतरनाक हो गए हैं।
यह रखें सावधानी
– धुंध में वाहन चलाते समय हैड लाइट, डिपर व इंडीकेटर का उपयोग करें।
– कोहरे में ज्यादा दूर तक रोशनी देने वाले हैड लाइट्स का उपयोग करें।
– सड़कों पर डिवाइडर लाइन, साइन बोर्ड व रिफ्लेक्टरों को ध्यान में रखकर गाड़ी को एक दिशा में चलाएं।
– दिन में धुंध के समय डे लाइट सिस्टम का उपयोग कर सकते हैं।
– धुंध के समय वाहन की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रतिघंटे की होनी चाहिए।
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