ग्वालियर-
जयारोग्य अस्पताल की कार्डियक यूनिट में अब कैथ लैब बनाने का काम शुरू होने वाला है। कंपनी के इंजीनियर लैब के स्थान का निरीक्षण कर गए हैं। गजराराजा मेडिकल कॉलेज के डीन ने साइट भी कंपनी के हैंडओवर कर दी है। तीन दिन में कंपनी साइट पर सिविल वर्क शुरू कर देगी। संभावना है दो माह में कैथ लैब स्थापित हो जाएगी। इसके बाद ग्वालियर के ह्दय रोगियों को एंजियोप्लास्टि, एंजियोग्राफी के लिए दिल्ली नहीं जाना होगा। साथ ही तत्काल इलाज भी मिल सकेगा।
जयारोग्य अस्पताल में जुलाई 2015 में कार्डियक यूनिट स्थापित हुई थी। साथ ही कैथ लैब भी बनना प्रस्तावित थी। कार्डियक यूनिट का तो शुभारंभ हो गया, मगर कैथ लैब का प्रोजेक्ट पिछले तीन साल से कागजों में ही अटका हुआ था। सन् 2017 में कैथ लैब के लिए शासन ने राशि स्वीकृत की थी। ये राशि लैब स्थापित करने के लिए तोशिबा कंपनी के पास पहुंच चुकी है। कंपनी के ही इंजीनियर आकर लैब की मशीनें इस्टॉल करेंगे, सिविल वर्क भी कराएंगे। इसके लिए कंपनी के इंजीनियर अपनी टीम के साथ ग्वालियर कार्डियक यूनिट का निरीक्षण करने पहुंचे थे। यूनिट में सेकंड फ्लोर पर लैब स्थापित होना है, स्थान को इंजीनियरों ने ओके कर दिया है। साथ ही जीआर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. भरत जैन ने कंपनी के इंजीनियरों को साइट हैंडओवर का लेटर भी जारी कर दिया है। अब अगले तीन दिन में कंपनी के इंजीनियर साइट को लैब के रूप में तैयार करने के लिए सिविल वर्क शुरू करेंगे।
मेडिकल कॉलेज ने लिखा था पत्रः
कैथ लैब के लिए जीआर मेडिकल कॉलेज ने कंपनी को पत्र लिखा था। साथ ही इंजीनियरों की टीम को जल्द ही भेजने की बात कही गई थी। साढ़े छह करोड़ की लागत से यह लैब स्थापित होगी। इसमें सभी मशीनें अत्याधुनिक होंगी, जिससे ह्दय रोगियों का बेहतर उपचार हो सकेगा।
अधूरी है कार्डियक यूनिटः
जेएएच में संचालित कार्डियक यूनिट बिना कैथ लैब के अधूरी है, क्योंकि इसमें ह्दय रोगियों का चेकअप एवं दवाओं से तो उपचार हो जाता है, मगर एंजियोप्लास्टि, एंजियोग्राफी व पेस मेकर के लिए मरीज को दिल्ली जाना पड़ता है। वहां भीड़ अधिक होने के कारण कई दिनों बाद नंबर आता है। साथ ही पैसा भी अधिक खर्च होता है। कुछ डॉक्टर ग्वालियर आकर एंजियोप्लास्टि, एंजियोग्राफी करते हैं, लेकिन डॉक्टर उपचार करके दिल्ली लौट जाते हैं, बाद में रूटीन चेकअप के लिए लोगों को दिल्ली जाना पड़ता है।
क्यों लगेगा समयः
कैथ लैब स्थापित करने में करीब दो माह का समय लगेगा। ऐसे में मार्च माह में लैब तैयार होने की संभावना है, क्योंकि इसमें कंपनी को रेडियो एक्टिव से बचाव के तमाम इंतजाम करना होंगे।
वर्जनः
शासन प्रशासन के सहयोग से कैथ लैब जल्द ही प्रारंभ की जाएगी। इंजीनियर की टीम साइट का निरीक्षण कर चुकी है, काम भी जल्द ही शुरू हो जाएगा। यह ग्वालियर अंचल के लोगों के लिए बड़ी सौगात होगी। इस लैब के स्थापित होने के बाद अंचल के हृदय रोगियों को उपचार के लिए दिल्ली तक नहीं जाना होगा।
डॉ. अशोक मिश्रा, अधीक्षक जेएएच
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