ग्वालियर
डबरा-सिविल अस्पताल में आने वाले गंभीर मरीजों के इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा लाखों रुपए खर्च कर आईसीयू तो बनवा दिया गया है, लेकिन स्टाफ नहीं उपलब्ध कराए जाने के कारण मरीजों को अभी तक आईसीयू का लाभ नहीं मिल सका है। स्टाफ नहीं होने के कारण गंभीर मरीजों को इलाज के लिए ग्वालियर रैफर करना पड़ रहा है।
केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह ने दिए सांसद निधि से ५० लाख चालू नहीं हो सका लोगों का कहना हे कि डबरा के लिए डॉक्टर नहीं मिल रहे ऐसा क्यों क्या डबरा के लोगों की जान की कोई कीमत नहीं हे सिर्फ नेताओंको ही हेल्थ सुविधा चाहिए आम वोटरों को नहीं शायद यही कारण हे भाजपा हारती हे
सिविल अस्पताल के पैथोलॉजी विभाग में पिछले काफी समय से टेक्निशियनों की कमी चल रही है। पैथोलॉजी में टेक्निशियन के चार पद हैं, लेकिन वर्तमान में केवल दो टेक्निशियन के भरोसे ही जांचें हो रही हैं। रोजाना लगभग एक सैंकड़ा मरीज जांच कराने के लिए आते हैं, लेकिन पर्याप्त टेक्निशियन नहीं होने के कारण एक दिन में इतने मरीजों की जांच करना मुश्किल हो रहा है। खाली पड़े पदों को भरने के लिए स्थानीय प्रबंधन द्वारा कई बार मांग की जा चुकी है, लेकिन अभी लैब टेक्निशियन की नियुक्ति नहीं की गई है। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
जांचें हो रही हैं प्रभावित
जानकारों ने बताया कि सिविल अस्पताल में काफी समय से केवल दो ही टेक्निशियन के भरोसे जांचें की जा रही हैं। मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण कई बार मरीजों को बिना जांच कराए ही लौटना पड़ता है। अस्पताल में वैसे तो रोजाना लगभग 80 से 100 मरीज जांच कराने आते हैं, लेकिन सोमवार, मंगलवार और बुधवार को मरीजों की संख्या 170 के पास पहुंच जाती है। स्टाफ की कमी के कारण ब्लड तथा यूरिन की छोटी-छोटी जांच करना भी मुश्किल हो जाती है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर नहीं है एक भी टेक्निशियन
स्वास्थ्य विभाग द्वारा ब्लॉक के पिछोर, शुक्लहारी, करियावटी, बिलौआ प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर ब्लड तथा यूरिन टेस्ट के लिए लैब तो बनवा दी गई हैं, लेकिन किसी भी केन्द्र पर अभी तक टेक्निशियन की नियुक्ति नहीं की गई है। इन लैबों पर हमेशा ताला लटका रहता है। आसपास के गांवों से आने वाले मरीजों को जांच कराने के लिए डबरा आना पड़ता है। लाखों रुपए से खरीदी गईं मशीनें भी कबाड़ हो रही हैं।
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