ग्वालियर-
देश में तेजी से बढ़ रहे कैंसर रोग और अन्य बीमारियों की रोकथाम व खेती में लागत को कम करने के लिए लाल टिपारा आदर्श गौशाला में जैविक खेती को लेकर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में भाग लेने आए मैथाना के किसानों ने अपने गांव को आदर्श जैविक गांव बनाने का संकल्प लिया। वहीं जैविक खेती से जुड़ी कई प्रकार की जानकारी विशेषज्ञों ने किसानों को दी।
जैविक खेती को बढ़ाने और गौवंश के संरक्षण के लिए नगर निगम की लाल टिपारा गौशाला में कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में जैविक खेती और गाय से जुड़े विशेषज्ञों को बुलाया गया। साथ ही कई गांव के किसानों को आमंत्रित किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि रसायनिक खाद के कारण एक ओर जहां खेती की जमीन बर्बाद हो रही है। वहीं खेती में लागत भी अधिक बढ़ गई है। इस दौरान विशेषज्ञों ने गाय के गोबर से जैविक खाद तैयार करने के तरीके बताए। वहीं गाय की पेशाब से किस प्रकार जैविक दवाएं तैयार की जाती हैं। इसके बारे में भी जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि गाय की पेशाब से खेती को नुकसान पहुंचाने वाले सभी प्रकार के कीटाणुओं को खत्म किया जा सकता है। जबकि गाय की पेशाब से तैयार की गई दवाएं खेती के लिए उपयुक्त जीवाणुओं के लिए फायदेमंद होती है। वहीं विशेषज्ञों ने गौमूत्र से फिनायन, दवाएं आदि बनाने के बारे में किसानों को जानकारी दी। इसके बाद मैथाना गांव के किसानों ने जैविक खेती के जरिए अपने गांव को आदर्श गांव बनाने का संकल्प लिया। कार्यशाला में ‘जैविक से जीवन्त’ कार्यक्रम की अध्यक्षत श्रीकृष्णायन गौशाला हरिद्वार के संत स्वामी ऋृषभदेवानंद महाराज ने की। इस अवसर पर कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसके सिंह, डॉ. केपी सिंह भदौरिया, वेदपाल झा, डीआरडीई के वैज्ञानिक विवेक आदि उपस्थित थे।
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