
BK-NEWS ब्यूरो कार्यालय बैढ़न सिंगरौली- प्रदेश भर के 51 जाती सहित गडरिया पाल जाति का दैनीय स्थिति होते हुए भी पिछड़ी जाति के सूची में रखा गया था जिनके स्थिति को देखते हुए एक सूची तैयार की गई जिस सूची में गंभीरता से विचार करते हुए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा एक आदेश जारी किया गया था किंतु जिला

प्रशासन के नाकामी के चलते घुमक्कड़ अर्ध घुमक्कड़ पाल गडरिया जनजाति को मिलने वाले लाभों से वर्षों वंचित रहें बताया जा रहा है मध्य प्रदेश शासन अक्टूबर वर्ष 2018 में 50 जातियों की सूची पर कार्यवाही करते हुए पाल गडरिया जाति को घुमक्कड़/अर्ध घुमक्कड़ जन जाती में शामिल किए जाने का आदेश जारी हुआ था किंतु जानकारी का आभाव कहे या जिला प्रशासन की नाकामी के चलते सिंगरौली जिले में एक भी प्रमाण पत्र जारी नहीं किए गए, जिस कारण जन जाति को मिलने वाले लाभों से पाल गडरिया समाज कई वर्षों तक वंचित रहे, वहीं स्थानीय प्रशासन सहित जिला प्रशासन की नाकामी को देखते हुए समाजसेवी जागेश्वर पाल द्वारा वर्षों जमीनी संघर्ष के साथ-साथ अदालती संघर्ष किया गया तब कहीं जाकर पहला प्रमाण पत्र जागेश्वर पाल का धनगर/गडरिया (पाल बघेले) के नाम से 24 दिसंबर 2024 को सुरेश जादव एसडीएम चितरंगी के द्वारा जारी किया गया है वही सामाजिक संघर्ष में हुए जीत की जानकारी देते हुए समाजसेवी जागेश्वर (पाल बघेले) द्वारा बताया गया कि काफी संघर्ष के बाद मेरे साथ जिला के लगभग तीस हजार से भी ज्यादा पाल/गडरिया शासन से मिलने वाले लाभ से लाभान्वित होंगे
प्रमाण पत्र में लेख है- प्रमाणित किया जाता है कि जागेश्वर पाल पिता छोटेलाल पाल एवं माता श्रीमती मनती देवी निवासी ग्राम भूर्तिया टोला तहसील चितरंगी जिला सिंगरौली (मध्य प्रदेश) धनगर/गडरिया (पाल बघेले) जाति के सदस्य हैं और इस जाति को (मध्य प्रदेश) में घुमक्कड़/अर्ध घुमक्कड़ जाति के रूप में विनिर्दिष्ट किया गया है जो इन जातियों की सूची अनुक्रमांक 30 पर अंकित है यह प्रमाण पत्र सरपंच, ग्राम पंचायत 10, श्री मनबसिया देवी के प्रमाणीकरण के आधार पर जारी किया जा रहा है।
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