ग्वालियर. ग्वालियरवासियों पर कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ रहा है। पहले दूध वाला, फिर चक्की चलाने और मोमाज बेचने वाला संक्रमित पाया गया था।फल का ठेला लगाने वाला युवक और एक ऑटो चालक के संक्रमित मिलने से चिंता और बढ़ गई है। ये दोनों लोग मुरार क्षेत्र में कारोबार करते थे और इस दौरान काफी लोगों के संपर्क में आए। मंगलवार को जिन 11 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई, उनमें 6 की ट्रेवल हिस्ट्री नहीं है। इससे मरीजों के संपर्क को खंगालना भी प्रशासन के लिए चुनौती होगा।
लोगों के संपर्क में आने वाले दोनों सर्विस प्रोवाइडर ने पूल टेस्टिंग के लिए दिया था सैंपल
तिलक सिंह (55), मोहनपुर: एसएएफ 14 बटालियन में तिलक सिंह की पोस्टिंग राजभवन भाेपाल में है। 2 दिन पहले वह भोपाल से लौटे। बुखार व गले में खराश हाेने पर उन्हाेंने जिला अस्पताल में ट्रूनेट मशीन से जांच कराई ताे रिपाेर्ट पाॅजिटिव आई।
वासुदेव सिंह (37), 14 बटालियन: एसएएफ 14 बटालियन में कार्यरत वासुदेव की पोस्टिंग भी राजभवन भाेपाल में है। वह 21 जून को ग्वालियर लौटे। सोमवार को उसने सैंपल दिया जो पॉजिटिव आया है।
विजय सिंह (34), कांच मिल: दिल्ली में पोहे का ठेला लगाता था। 14 दिन पहले घर लौटा। यहां घर में किराने की दुकान चलती है। वह परिजन के साथ दुकान पर भी बैठा। 2-3 दिन से बुखार, खांसी और सांस लेने में परेशानी हाेने पर उसने जिला अस्पताल में सैंपल दिया। ट्रूनेट मशीन की जांच में वह पॉजिटिव आया है।
मनोज लोधी (45), हरीशंकरपुरम: मनाेज गत 21 जून को पॉजिटिव निकले आयुष के मौसा हैं। वह आयुष के संपर्क में आए थे।
सचिन गोयल (30), लधेड़ी: सचिन जाेमेटो में कार्यरत है। जून में वह काम पर नहीं गया। 5 दिन से उसे बुखार था। जांच कराने पर रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। उसके घर में 4 लोग हैं।
ऊषा लोकवानी (58), लाला का बाजार: ऊषा अपनी बहू के साथ 15 जून को मुंबई से लौटी हैं। यहां आने के बाद उन्होंने बहू के साथ सैंपल दिया। बहू की रिपोर्ट निगेटिव और उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
हिमांशु शर्मा (13)जीवाजीगंज: हिमांशु अपनी मां अर्चना, भाई लवी, संजीव और बहन दिव्यांशी के साथ 14 जून को दिल्ली लौटे थे। एहतियातन जांच कराने पर हिमांशु की रिपोर्ट पॉजिटिव व अन्य सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई है।
मुकेश बंसल(41) विनय नगर: मुकेश वृंदावन आटा कंपनी में काम करते हैं। वह 15 दिन से काम पर नहीं गए हैं। तीन दिन पहले उन्हें बुखार आया था और गला चिपचिपा रहा था। जांच में रिपाेर्ट पाॅजिटिव आई।
सचिन (19), बंशीपुरा: सचिन बारादरी से शहर में ऑटो चलाता है। उसने पूल सैंपल में अपना दिया था, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
राहुल सिंह (28), महेशपुरा: राहुल मुरार क्षेत्र में फल का ठेला लगाता है। उसने पूल में सैंपल दिया था, जो पॉजिटिव आया है।
मीरा पवैया (40), गिरवाई: मीरा ने तबियत खराब होने पर सोमवार को जेएएच में दिखाया था। सैंपल देने पर रिपाेर्ट पॉजिटिव पाई गई।
कोरोना में लापरवाही
कोरोना को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है। ऐसे कई परिवार हैं जिनमें पॉजिटिव मरीज मिले, लेकिन उनके परिजनों के ही सैंपल नहीं लिए गए।
संक्रमित के मां-भाई का टेस्ट नहीं
दिल्ली में जॉब करने वाला निखिल 13 जून की रात को ग्वालियर आया। 2 दिन बाद वह जांच कराने मुरार स्थित जिला अस्पताल पहुंचा। टेस्ट रिपोर्ट में निखिल को पॉजिटिव बताया गया। निखिल को अस्पताल में भर्ती किया गया, लेकिन निखिल के परिवार में किसी का कोई सैंपल नहीं लिया गया। निखिल की मां श्रीमती कांति ने बताया कि दिल्ली से लौटकर निखिल मेरे और छोटे बेटे कुनाल के साथ घर में रहा। अब तक स्वास्थ्य विभाग की टीम उनके पास नहीं आई।
मां-पत्नी अस्पताल से बिना जांच लौटी
सीआरपीएफ जवान तलारी राजा सैंपल देने से रिपोर्ट आने तक के बीच 3 दिन मां और पत्नी के साथ घर पर रहे। 16 जून को उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कर दिया गया, लेकिन अब तक मां और पत्नी के सैंपल नहीं लिए गए। तलारी राजा ने बताया कि एक-दो दिन मां ने स्वास्थ्य विभाग की टीम का इंतजार किया। बाद में दोनों जिला अस्पताल मुरार में सैंपल देने पहुंचीं लेकिन सैंपल नहीं लिया। यहां से उन्हें 3 बार बिना सैंपल दिए आना पड़ा।
यह मामला अधिकारियों की जानकारी में लाकर सैंपल कराती हूं
पॉजिटिव आए लोगों की कांटेक्ट हिस्ट्री तलाश कर भी सैंपलिंग कराई जाती है, बस इतना ध्यान दिया जाता है कि जो लोग हाई रिस्क कांटेक्ट वाले हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जाए। यदि किसी केस में ऐसा हुआ है कि परिजनों के भी सैंपल नहीं हो पाए हैं तो मैं संबंधित इंसीडेंट कमांडेंट और दूसरे अधिकारियों की जानकारी में इसेे लाकर सैंपल कराती हूं।
-डॉ. बिंदु सिंघल, स्वास्थ्य विभाग
सैंपल सूखे निकले पर मैसेज दे रहे- आपकी रिपोर्ट निगेटिव
केस-1, नंदिनी (26): लॉकडाउन के कारण कटनी में अपनी बुआ के घर फंस गई नंदिनी अपने भाई संजीव परिहार के साथ ग्वालियर लौटी। सावधानी बतौर परिजन उसे अस्पताल ले गए। वहां उन्हें 18 जून को पुन: सैंपलिंग के लिए आने की बात कही गई। 19 जून को आई रिपोर्ट में बताया गया कि नंदिनी का सैंपल ड्राय निकला। इस कारण जांच नहीं हो सकी। लेकिन उनके मोबाइल पर भेजे गए मैसेज में रिपोर्ट निगेटिव बताई गई। इस कारण नंदिनी का फिर से सैंपल नहीं लिया गया।
केस-2 , प्रिंस (10) : दिनेश राठौर के भाई देवेंद्र, भोपाल के कोलार क्षेत्र में मोमोस का ठेला लगाते थे। लॉकडाउन के चलते जब उनका काम धंधा बंद हो गया तो वे लौट कर अपने घर आ गए। आने के बाद अस्पताल में अपने और परिजनों के सैंपल दिए। सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई। इसमें 10 वर्ष के बेटे प्रिंस की रिपोर्ट भी निगेटिव आई है। लेकिन जब रिपोर्ट की पड़ताल की तो उसमें प्रिंस के सैंपल को ड्राय बताया गया। लेकिन मैसेज यही आया कि सैंपल निगेटिव निकला है।
अब तक रिजेक्ट हुए 161 सैंपलों में से 15 फीसदी सैंपल ड्राय निकले हैं। इनमें कुछ लोगों के ही सैंपल फिर से लिए गए।
ऐसे मामलों में मरीजों के दोबारा सैंपल होना चाहिए
सैंपलिंग के दौरान कई कारणों से सैंपल लैब तक आते-आते सूख जाते हैं। तकनीकी तौर पर ऐसे सैंपलों की जांच संभव नहीं है, क्योंकि इन सैंपलों में आरएनए एक्सट्रेक्शन की प्रक्रिया नहीं की जा सकती। ऐसे मामलों में संदिग्ध के पुन: सैंपल लेना चाहिए। -डॉ. वैभव मिश्रा, प्रिंसिपल इंवेस्टीगेटर, जीआरएमसी
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