रतलाम – घातक कैंसर जैसी बीमारी को मात देकर जिंदगी की जंग जीत चुके रतलाम की गुलमोहर कॉलोनी निवासी बाबूलाल सौभाग्यमल मोदी आज इसके मरीजों के जीवन में प्रकाश भरने का काम कर रहे हैं। 2013 में उन्हें प्रोस्टेट कैंसर की पुष्टि हुई तो वे कुछ निराश हुए, लेकिन परिवार व दोस्तों ने हौंसला दिया। इलाज शुरू हुआ। कई टेस्ट हुए जो पीड़ादायक थे।
कीमोथैरेपी के बाद सर्जरी हुई। सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास के कारण इलाज सफल रहा। डॉक्टरों ने उनकी जीवटता देख काउंसलर बनने का सुझाव दिया तो जीवन में बदलाव आ गया। वे अब तक 500 मरीजों की काउंसलिंग कर चुके हैं, जो जिंदगी से हार चुके थे। वे कहते हैं ‘मुझे जीना है’ यह वाक्य ही कैंसर की दवा है। बोलते रहिए, अपने आप से, अपनों से, दूसरों से।
बाबूलाल मोदी ने बताया कि इलाज के दौरान वे डॉक्टरों से कैंसर से संबंधित हर तरह की जानकारी लेते रहे। बीमारी से संबंधित जानकारी मरीज को बीमारी से लड़ने का हौसला देती है। ठीक होने के बाद अब तक 500 मरीजों की काउंसलिंग की, जो जिंदगी से हार चुके थे। वह मरीज को खुद का उदाहरण देकर कहते हैं कि कि मुझे जीना है यही है मेडिसीन।
जिला अस्पताल के कैंसर रोग विशेष एवं सर्जन डॉ. गोपाल यादव ने बताया कि बाबूलाल मोदी 85 साल की उम्र में भी कैंसर के मरीजों का हौसला बढ़ा रहे हैं और जीने की नई राह दिखा रहे हैं। डॉ. गोपाल यादव ने बताया कि 2013 से अब तक जिले में 1685 कैंसर रोगियों का पंजीयन किया गया जिसमें 1300 को कीमोथैरेपी और अन्य को दूसरे उपचार दिए जा चुके हैं। यहां अभी सर्जरी नहीं हो रही हैै।
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