ग्वालियर
13 दिसंबर से गठित एंटी माफिया सेल की बड़ी कार्रवाई के नाम पर दो बड़े नामों पर हाथ डाला गया है। हकीकत में जिस सरकारी जमीनों को माफिया से दनादन मुक्त कराने का दावा किया जा रहा है, वह तो अफसरों की ड्यूटी ही थी।
माफिया बर्स्ट करने के नाम पर अब तक एंटी माफिया सेल खाली हाथ है। आलीशान इमारतों और बड़े-बड़े नामों की देहरी को छूकर अफसर-अमला वापस लौटे और बैठे हैं। ग्वालियर एक्रोबू प्रायवेट लिमिटेड (रायरू डिस्टिलरी) की पट्टों को दबाने की जांच रिपोर्ट वाली फाइल को हाल ही में अपर जिला मजिस्ट्रेट की ओर से मांगा गया है लेकिन यह फाइल कहां गई, जांच क्या हुई, पता ही नहीं है। अब आलीशान इमारतों को देखा जाए तो क्लार्क्स इन सूटस, नारायणम, प्रभा इंटरनेशनल जैसे बड़े होटल और संस्थानों पर नोटिस तक कार्रवाई सिमट गई। भू-माफिया साहब सिंह, राजू कुकरेजा की एक-एक इमारत पर एंटी माफिया सेल ठहर गया। इधर अतिक्रमण हटाने जैसी कार्रवाई करने में सेल जुटा है, जबकि मकसद कुछ और ही था।
एंटी माफियाः जैसा नाम वैसा काम नहीं
कलेक्टर अनुराग चौधरी ने 13 दिसंबर 2019 को एंटी माफिया सेल का गठन किया। प्रभारी आईएएस अपर कलेक्टर अनूप सिंह को बनाया गया। इसके अलावा एसडीएम मुरार जयति सिंह, अपर आयुक्त निगम नरोत्तम भार्गव, संयुक्त कलेक्टर विनोद भार्गव, एसडीएम झांसी रोड अनिल बनवारिया, एसडीएम ग्वालियर सिटी प्रदीप तोमर, डिप्टी कलेक्टर दीपशिखा भगत, सीएसपी समीर सौरभ, रजत सकलेचा व निवेदिता नायडू शामिल हैं।
कर क्या रहा है सेल, कार्यप्रणाली से समझें
1-जिला प्रशासनः भू-माफियाओं की कमर तोड़ने की बात की जाए तो दो बड़े नाम यानि दो माफिया पहला अटैक राजू कुकरेजा के सिटी सेंटर स्थित बिना अनुमति ला सफायर कॉम्प्लेक्स को जमींदोज किया। अब यह तो गिरा दिया, लेकिन राजू की दूसरी संपत्तियां को टच भी नहीं कर रहे। इधर कांगे्रस नेता साहब सिंह का ओहदपुर में बहुमंजिला निर्माणाधीन कॉम्प्लेक्स तोड़ा। जब प्रशासन ने माफिया कहा तो एक कॉम्प्लेक्स की कार्रवाई माफिया जैसी नहीं थी।
2-नगर निगमः थोक में नोटिस जारी किए गए और जिन आलीशान इमारतों को अवैध निर्माण बताया गया वहां मामला नोटिस तक सिमट गया। 76 नामों की जो सूची जारी हुई,उसको लेकर निगम का दावा है कि यह तुड़ाई वाली नहीं नपाई वाली है। निगम के अनुसार नोटिस वे जारी करते हैं और तुड़ाई प्रशासन के कहने पर होती है।
3-पुलिसः पुलिस ने सिर्फ एक ही कुख्यात सटोरिया माइकल को पकड़ा है। आर्गेनाइज क्राइम, स्मैक, देह व्यापार या बड़े अपराध पर अभी तक पुलिस ने चोट नहीं की है।
रायरू डिस्टलरीः छापा मारा, जांच के आदेश दिए, रिपोर्ट दब गई
मई 2019 में कलेक्टर ने सभी विभागों के अधिकारियों के साथ रायरू डिस्टलरी में छापामार कार्रवाई की थी। छापा मारा, नमूने लिए गए और कई अनियमितताएं भी मिलीं। ग्वालियर सिटी एसडीएम प्रदीप तोमर को कलेक्टर ने जमीन की जांच करने के निर्देश दिए थे। इसी जमीन की 2014 में जिला प्रशासन ने जांच कराई थी, जिसमें राजस्व की रिपोर्ट में आदिवासियों के पट्टों को फैक्ट्री के जरिए दबाना सामने आया था। अब उसी रिपोर्ट सहित एसडीएम की जांच की फाइल को अपर जिला मजिस्ट्रेट ने मांगा है, लेकिन पिछले 10 दिन से इसका पता ही नहीं चल पा रहा है।
जानकारी मांगी है
रायरू डिस्टलरी की रिपोर्ट ग्वालियर सिटी एसडीएम से मांगी गई है। इसकी पहले हुई जांच रिपोर्ट को भी मांगा जा रहा है जिससे जमीन की सही स्थिति सामने आ सके।
टीएन सिंह, अपर जिला मजिस्ट्रेट
जांच रिपोर्ट दे रहे हैं
रायरू डिस्टलरी की जांच रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जिला कलेक्टर के आदेश पर जांच-पड़ताल की गई है। जल्द रिपोर्ट दे दी जाएगी।
प्रदीप तोमर, एसडीएम, ग्वालियर सिटी
नहीं कनेक्ट हुआ मोबाइल
इस संबंध में रायरू डिस्टलरी के डायरेक्टर आदिल बापना के मोबाइल नंबर संपर्क किया गया, लेकिन उनका फोन नहीं कनेक्ट हो सका। उन्हें मैसेज भी किया गया लेकिन कोई रिप्लाई नहीं आया।
प्रभारी का फोन नहीं उठा
एंटी माफिया सेल की कार्यप्रणाली को लेकर जब प्रभारी अनूप सिंह के मोबाइल नंबर पर फोन किया गया तो उनका मोबाइल नहीं उठा। उन्हें मैसेज भी किया गया लेकिन कोई रिप्लाई नहीं आया।
यह पहला चरण है, बड़ी कार्रवाई होगी
एंटी माफिया सेल द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। दो नाम ही नहीं बल्कि प्रभावी और भी कार्रवाइयां शेष हैं। यह पहला चरण है। सरकारी जमीनों को लगातार मुक्त कराया जा रहा है। बड़े माफियाओं पर सख्त कार्रवाई होगी।
अनुराग चौधरी, कलेक्टर
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