ग्वालियर
शहर सेभैंस डेयरियों को बाहर किए जाने के लिए शुरू हुई कार्रवाई पर विधायक मुन्नालाल गोयल ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कलेक्टर अनुराग चौधरी और नगर निगम आयुक्त संदीप माकिन को पत्र लिखकर कहा है कि यदि शहर के अंदर चल रहीं डेयरियों को बाहर शिफ्ट करना है तो उसके लिए पहले शहर से सटे क्षेत्र में सही जगह चुनकर उसे विकसित किया जाए। वहीं इस पत्र के बाद दूसरे दिन जिला प्रशासन व नगर निगम डेयरियों को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की है।
श्री गोयल ने पत्र में कहा है कि जिला योजना समिति की बैठक में मैंने यह मामला रखा था और प्रभारी मंत्री उमंग सिंघार ने निर्देश दिए थे कि शहर की हर दिशा में ऐसे स्थान चयनित किए जाएं। जो कि डेयरी संचालकों तथा लोगों की पहुंच में हों, ताकि शहर में दूध सप्लाई का सिस्टम न बिगड़े। लेकिन अफसरों ने ऐसी कोई तैयारी किए बिना सीधे कार्रवाई शुरू कर दी है जिससे व्यवस्था बिगड़ेगी। मुरार एवं थाटीपुर क्षेत्र की दुध डेयरीयांे को मुरार क्षेत्र के आस-पास बडागांव, सिरोल, डोंगरपुर, अलापुर, मोहनपुर आदि स्थानों की शासकीय भूमि पर ग्वाला नगर बसाकर शिफ्ट किया जाए। यदि ग्वाला नगर को ज्यादा दूर रखा जाएगा तो का दूध व्यापार भी खत्म हो जाएगा।
दूसरे दिन नहीं की गई डेयरियों पर कार्रवाई
हर बैठक में मुद्दा, निर्देश भी दिए गए लेकिन काम नहीं
डेयरियों को शिफ्ट करने का मुद्दा हर बैठक में उठता है और शिफ्टिंग के लिए उचित जगह चिन्हित कर उसे विकसित करने के निर्देश भी दिए जाते हैं। लेकिन ऐसा होता नहीं है। 28 जनवरी को पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, 10 फरवरी को प्रभारी मंत्री उमंग सिंघार ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि शहर से 2-5 किलोमीटर के दायरे में सरकारी जमीन पर ग्वाला नगर बसाए जाएं।
पहले सुविधाएं देना चाहिए
न किसी से चर्चा की न कोई सर्वे, इस तरह कार्रवाई से बिगड़ सकती है कानून व्यवस्था
शिफ्टिंग से पहले प्रशासन रणनीति बनाए
शहर में तकरीबन 700 से अधिक पशु डेयरियां हैं, लेकिन इन्हें चलाने वाले पशुपालकों से अब तक किसी भी अफसर की कोई चर्चा नहीं हुई है। निगम द्वारा इन पशु डेयरियों का सर्वे तक नहीं कराया गया है। बगैर किसी तैयारी के मुरार क्षेत्र में पशु डेयरियों को खाली कराने की कार्रवाई होती है तो इससे शहर में लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति बन सकती है।
190 प्लॉट पर 700 डेयरियां कैसे होंगी शिफ्ट
पहली बार तो ग्राम पिपरौली में स्थित ग्वाला नगर में प्लॉट पशु पालकों को खरीदना होंगे। लेकिन इसके लिए उन्हें तैयार भी करना पड़ेगा। लेकिन इस दिशा में आज तक किसी भी पशुपालक से कोई चर्चा नहीं हुई। दूसरा, ग्वाला नगर में सिर्फ 190 प्लॉट हैं, जिनका साइज 1 हजार से 2 हजार वर्गफीट है। जबकि डेयरियां 700 से अधिक। ऐसे में 700 डेयरियों को 190 प्लॉट में शिफ्ट कैसे किया जाएगा, इसे लेकर भी प्रशासन कुछ स्पष्ट नहीं कर रहा है।
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