ग्वालियर
प्रसूताओं के प्रसव और उसके 42 दिन बाद होने वाली मौतों के मामले की खोजबीन का काम स्वास्थ्य विभाग ने तेजी से शुरू करा दिया है।
विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों ने मौत के मामले को दबाया या कम ज्यादा किया तो उनकी नौकरी तक तलवार लटक सकती है। दूसरी ओर ऐसी मौत की सूचना देने वालों को एक हजार रूपए का इनाम दिया जाएगा।
मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है। शासन के प्रयास हैं कि 1000 की आबादी पर मातृ मृत्यु दर 80 से कम होना चाहिए। क्योंकि संस्थागत सुरक्षित प्रसव कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग हर साल करोड़ों रूपए व्यय कर रहा है।
मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने शुरू किया खोजबीन का काम
फाइल तैयार कर भोपाल से होगी निगरानी
मौत प्रसव की जटिलता
प्रसव के दौरान हाेने वाली मौत प्रसव की जटिलता का प्रकरण माना जाएगा। इसलिए सरकार ने ऐसे मामलों की खोज के लिए इनाम तक घोषित कर दिया है। कोई भी व्यक्ति अगर सर्वप्रथम सूचना देगा तो उसे एक हजार का इनाम दिया जाएगा। इसके अलावा संस्थागत प्रसव के दौरान होने वाली मौतों के मामलों का रिकार्ड होता है, लेकिन महिला जब छुट्टी होने पर घर चली जाती है, वहां पर अगर उसकी मौत होती है तो यह रिकार्ड में दर्ज नहीं होती है। इसलिए इन्हें भी खोजा जाएगा।
प्रसव के समय या 42 दिन के भीतर मौत का होगा ऑडिट
प्रसव के बाद होने वाली मौत की वजह तलाश कर उसकी रोकथाम के उपाय किए जाने चाहिए। नई व्यवस्था के तहत प्रसव और उसके 42 दिन बाद भी अगर किसी महिला की मौत होती है तो उसका ऑडिट होगा। इन मौतों को प्रसव की जटिलता में ही शामिल किया जाएगा। इस वजह से इनाम दिए जाने की घोषणा की गई। प्रदेश के मुख्य सचिव ने इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। वहीं प्रसव बाद माैत के कारण तलाशे जाएंगे। फाइल तैयार करके इसकी निगरानी भोपाल से होगी। गौरतलब है आज-कल घर हो या अस्पताल प्रसूताओं की मौत के मामलों का आंकड़ा बढ़ रहा है। इन मौतों को रोकने के लिए सरकार ने यह नई व्यवस्था की है। इस व्यवस्था के तहत अब प्रसूता की मौत होती है तो उसकी जांच होगी और ऐसी मौतों को यदि दबाया जाता है अौर प्रशासन को पता चलता है तो कार्रवाई भी हो सकती है। इससे अलग यदि सरकारी कर्मचारी की ओर से इस तरह का केस दबाया जाता है और इस घटना को छिपाया गया तो पता चलने के बाद उसकी नौकरी पर भी तलवार लटक सकती है।
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