ग्वालियर- पीएम नरेंद्र मोदी ने रेडियो कार्यक्रम मन की बात में ग्वालियर स्टेशन पर यात्रियों को पानी पिलाने वालीं सरला त्रिपाठी(90 वर्ष) का जिक्र करते हुए उनकी जमकर तारीफ की।
पीएम मोदी ने कहा, मेरे प्यारे देशवासियो, पिछली मन की बात में हमने तय किया था कि इस दीपावली पर कुछ अलग करेंगे। मैंने कहा था – आइए, हम सभी इस दीपावली पर भारत की नारी शक्ति और उनकी उपलब्धियों को सेलिब्रेट करें, ये भारत की लक्ष्मी का सम्मान है। भारत की लक्ष्मी की ऐसी अनेक कहानियां लोगों ने शेयर की हैं। आप जरुर पढ़िए, प्रेरणा लीजिये और खुद भी ऐसा ही कुछ अपने आस-पास से शेयर कीजिए। मेरा, भारत की इन सभी लक्ष्मियों को आदरपूर्वक नमन है।
मैंने कहा था कि इस दिवाली भारत की नारी शक्ति और उनकी उपब्धियों को सेलीब्रेट करेंगे, यानी भारत की लक्ष्मी का सम्मान करेंगे। और देखते ही देखते इसके बाद सोशल मीडिया पर ऐसी इंस्पीरेशनल स्टोरीज की बाढ़ आ गई। इसी दौरान मोदी ने सरला त्रिपाठी का जिक्र किया जो 90 वर्ष से अधिक की उम्र में ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों को पानी पिलाती हैं। मोदी ने सरला त्रिपाठी को लक्ष्मी कहा। सरला 1996 से हर सुबह वे स्टेशन पहुंच जाती हैं और वहां आने वाली ट्रेन के यात्रियों के पास जाकर उन्हें पानी देती हैं। सबसे पूछतीं हैं पानी पीना है।
बुजुर्ग महिला की इस सेवा को देखकर यात्री हतप्रभ हो जाते हैं। रोज यहां से आने-जाने वाले यात्री सरला त्रिपाठी को पहचानते हैं और प्यार से दादी अम्मा बुलाते हैं। वे दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं। उनके इस कार्य को देखकर शहर की संस्थाएं भी स्टेशन पर यात्रियों की प्यास बुझाने के लिए आगे आई हैं और उनके कार्य में सहयोग दे रही हैं।
‘गुरुनानक ने सादगी से सबका दिल जीता’
मोदी ने कहा, ‘‘12 नवंबर 2019, यह वो दिन है, जिस दिन दुनियाभर में गुरुनानक देव जी का 550वां प्रकाश उत्सव मनाया जाएगा। गुरुनानक देवजी के आदर्शों के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित हैं। उन्होंने सेवा को हमेशा सर्वोपरि रखा। गुरुनानक देव जी मानते थे कि निस्वार्थ भाव से किए गए सेवा कार्य की कोई कीमत नहीं हो सकती। वे छुआ-छूत जैसे सामाजिक बुराई के खिलाफ मजबूती से खड़े हुए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘गुरुनानक देवजी ने अपना संदेश, दुनिया में, दूर-दूर तक पहुंचाया। वे अपने समय में सबसे अधिक यात्राएं करने वालों में से थे। कई स्थानों पर गए और जहां भी गए वहां अपनी सरलता, विनम्रता, सादगी से उन्होंने सबका दिल जीत लिया। गुरुनानक देव जी ने कई महत्वपूर्ण धार्मिक यात्राएं की, जिन्हें ‘उदासी’ कहा जाता है। सद्भावना और समानत का संदेश लेकर वे, उत्तर हो या दक्षिण, पूर्व हो या पश्चिम- हर दिशा में गए, हर जगह लोगों से, संतों और ऋषियों से मिले।’’
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