डबरा-
डबराफसलों की अच्छी पैदावार होती हैप्रदेशकी प्रमुख ए ग्रेड की मंडी,है। । 15 साल पहले यहां करीब 170 से अधिक छोटे-बड़े उद्योग थे, लेकिन अब महज 10-12 ही रह गए हैं। इसका कारण उद्योगों के लिए सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराना और उद्योगों को बढ़ाने के लिए अफसरों द्वारा प्रयास नहीं करना है। हालत यह हैं कि जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र को पिछले छह साल से यहां औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए 20 हेक्टेयर जमीन नहीं मिल सकी है।
हालांकि दो साल पहले पहले इंडस्ट्रियल एरिया के लिए सिमरिया ताल के पास 20 हेक्टेयर जमीन चिन्हित की गई थी।अधिकारियों की लापरवाही से और राजनैतिक कारणों से उस जमीन पर इंडस्ट्रियल एरिया डवलप नहीं हो सका
प्रशासन ने जमीन विभाग के सुपुर्द भी कर दी थी।उस समय लाइन, मुरम, सड़कों ,पेयजलटंकी के लिए निशान भी बनाये गए राजनैतिक कारणों से उस जमीन पर इंडस्ट्रियल एरिया डवलप नहीं हो सका
लेकिन जब टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के तहत कार्रवाई की जा रही थी, उस वक्त पता चला कि जिस जमीन पर इंडस्ट्रियल एरिया डवलप किया जा रहा है, वह किसी अन्य प्रयोजन के लिए पहले ही स्वीकृत की जा चुकी है। जिससे उस जमीन पर इंडस्ट्रियल एरिया डवलप नहीं हो सका।
काम बंद: 15 साल पहले शहर में चल रही पोहा, दाल व ऑयल मिलों पर आज लगे हैं ताले
उद्योगों में पिछड़ा क्षेत्र…15 साल पहले डबरा में 170 उद्योग संचालित थे, अब महज 10-12 ही रह गए
सिमरियाताल व मगरौरा में जमीन नहीं मिली तो दोबारा प्रयास नहीं किए
शहर के रेलवे स्टेशन राेड पर स्थित पोहा मिल जो अब बंद पड़ी है।
शहर के रेलवे स्टेशन राेड पर स्थित पोहा मिल- नगर केबीच पोहा मिल और अमोनिया गैस से संचालित बर्फ फैक्ट्री चल रही जिससे प्रदूषण होता हे कई बार अधिकारियो को शिकायते हुई पर राजनैतिक दबाब में भाजपा नेताओं की होने के कारण शिकायते दबा दी गई
इंडस्ट्रियल क्षेत्र के लिए मगरौरा के पास जमीन चिन्हित की थी, लेकिन व्यापारियों ने वहां जाने से कर दिया मना
इंडस्ट्रियल क्षेत्र के लिए बाद में अफसरों ने मगरौरा के पास जमीन चिन्हित की गई थी। लेकिन यहां पर जमीन महंगी होने की वजह से व्यापारियों ने जाने से मना कर दिया था। इसके बाद अधिकारियों ने भी इस ओर गंभीरता नहीं दिखाई। हालांकि अधिकारियों का तर्क है कि उन्होंने जमीन देखी, लेकिन उन्हें जमीन नहीं मिली। वहीं राजस्व विभाग के अधिकारी नवनीत शर्मा का कहना है कि शहर के आसपास इंडस्ट्रियल एरिया के लिए काफी जमीन है। जिला व्यापार एवं उद्योग विभाग के अधिकारी यदि जमीन की मांग करें, तो उन्हें 20 हेक्टेयर तो क्या इससे ज्यादा जमीन भी उपलब्ध कराई जा सकती है।
ग्वालियर झांसी मार्ग मुख्य हाईवे पर है। यह क्षेत्र उद्यमियों के लिए ज्यादा अनुकूल है। यह मुबंई से 1084 किमी एवं दिल्ली से 329 किमी की दूरी है। इसके अलावा रेल सेवा की सीधी कनेक्टीविटी है।
शहर में बासमती चालव की पैदावार अधिक होती है। इसलिए इसलिए डबरा के अलावा ग्वालियर व हरियाणा के व्यापारी भी इंडस्ट्री लगाने को तैयार हैं। औद्योगिक क्षेत्र नहीं होने के कारण वे प्रोजेक्ट शुरू नहीं कर पा रहे हैं।
अफसर समन्वय बनाएं तो मिल सकती है जमीन
औद्योगिक क्षेत्र बनाने के लिए जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र और राजस्व विभाग के अधिकारी समन्वय बनाकर प्रयास करें तो जमीन मिलना मुश्किल नहीं। राजस्व विभाग के पास क्षेत्र में काफी जमीन है। लेकिन दोनों ही विभागों के बीच समन्वय नहीं बन पा रहा है। यही कारण है कि जमीन नहीं मिल पा रही है। वहीं शहर के जनप्रतिनिधियों द्वारा भी प्रयास नहीं किए गए जिससे औद्योगिक क्षेत्र नहीं बन पा रहा।
उद्योगों के लिए शहर में अनेक संभावनाएं
डबरा में ग्वालियर संभाग की दूसरी सबसे बड़ी ए ग्रेड की मंडी है, जिसकी सालाना आय 10 करोड़ से अधिक है।
यहां गेहूं, धान का उत्पादन अच्छी मात्रा में होता है। जिससे यहां आटा मिल, राइस मिल, पोहा मिल की संभावना अधिक है। पहले यहां यह मिलें सफलता पूर्वक संचालित होती रही हैं।
देश भर में सप्लाई होता था डबरा का चावल व पोहा
शहर में 15 साल पहले 170 से अधिक उद्योग संचालित थे। इनमें से 100 ऑयल मिल, 20 दाल मिल, 20 राइस मिल, 15 पोहा मिल संचालित यहां थीं। यहां से दाल-चावल, पोहा व धान देशभर में सप्लाई किया जाता था। लेकिन धीरे-धीरे सुविधाएं नहीं मिलने से उद्योग बंद हो गए। वर्ष 2005 से 2008 के बीच प्रदेश भर में हुई बिजली कटौती के बाद शहर का औद्योगिक व्यापार पूरी तरह पिछड़ गया।
इंडस्ट्रियल क्षेत्र के लिए जमीन नहीं मिल रही है
 इंडस्ट्रियल एरिया के लिए जमीन की तलाश की गई थी। सिमरियाताल के पास 20 हेक्टेयर जमीन चिन्हित की थी। लेकिन बाद में पता चला कि जमीन किसी अन्य प्रयोजन की है। जिससे वहां इंडस्ट्रियल एरिया नहीं बन सका। इसके बाद जमीन नहीं मिली।  अरविंद बौहरे, जीएम जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र ग्वालियर
डिमांड आएगी तो हम जमीन उपलब्ध कराएंगे
 जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र से किसी प्रकार की जमीन की डिमांड हमारे पास नहीं आई है। हो सकता उनके द्वारा इससे पहले डिमांड की गई होगी। यदि उन्हें जमीन की आवश्यकता है तो जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। शहर के आसपास काफी जमीन पड़ी हुई है।  नवनीत शर्मा, तहसीलदार डबरा
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