ग्वालियर-
शहर की डॉ. ललिता गौरव ने बाली इंडोनेशिया में हुई चौथी एशियन योगा थैरेपी कॉन्फ्रेंस में अपना रिसर्च पेपर प्रस्तुत किया। डॉ. ललिता गौरव ने बताया किस प्रकार उन्होंने अपने जीवनसाथी गौरव जैन के साथ इस जोखिम भरे विषय को चुना और इस पर काम किया। इसमें ज्यादातर सजायाफ्ता कैदी थे, जो हत्या जैसे अपराध कर चुके थे। ऐसे में शुरू में उन्हें कैदियों की मानसिकता को समझने और उन्हें योगाभ्यास के लिए प्रोत्साहित करने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा। बाद में जब सारे कैदी अपने अंदर बदलाव महसूस करने लगे तब हम एक परिवार की तरह जुड़ गए।

वे सम्मान से मुझे गुरु मां भी बुलाने लगे। इस रिसर्च कार्य के पूरा होने तक कई कैदियों के व्यवहार और मनःस्तिथि में बदलाव को देखकर जेल प्रशासन भी अचंभित था। डॉ. ललिता ने बताया कि इस कार्य के पूर्ण होने पर 55 कैदियों ने योग प्रशिक्षक बन कर काम शुरू किया और अपने साथियों का मनोबल बढ़ाने का निश्चय किया।
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