भोपाल- व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) घोटाले में शुरुआती जांच करने वाली स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की विवेचना में एक और गड़बड़ी सामने आई है। पीएमटी 2009, 2010, 2011 की सीबीआई जांच में कई ऐसे नाम सामने आए हैं, जिन्हें एसटीएफ ने क्लीनचिट दे दी थी। ऐसी ही एक शिकायत में करीब 40 अभ्यर्थियों के प्रवेश में गड़बड़ी की राजधानी के कोहेफिजा थाने में शिकायत की गई थी, जिसे उस समय एसटीएफ ने जांच में लिया था, मगर उसने इनमें से केवल पांच लोगों को ही आरोपी बनाया।
जब यह मामला सीबीआई के पास आया तो उसने जांच के बाद 20 लोगों के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के साक्ष्य पाए हैं और इस पर कार्रवाई के लिए अब एसटीएफ को प्रकरण भेज दिया है। सूत्रों के मुताबिक पीएमटी 2008 में उत्तीर्ण हुए एक मेडिकल स्टूडेंट ने कोहेफिजा थाने में 40 ऐसे मेडिकल स्टूडेंट की शिकायत की थी, जिनके प्रवेश में अनियमितताएं हुई थीं। 2013 में जब एसटीएफ ने व्यापमं घोटाले की जांच शुरू की तो इस मामले को भी उसे सौंपा गया था। एसटीएफ ने मामले में केवल पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर घोटाले में दर्ज मामलों को सीबीआई को सौंपा गया। सूत्रों ने बताया कि सीबीआई ने इस मामले की जांच पूरी कर आरोपितों के खिलाफ फाइनल चालान पेश कर दिया है। सीबीआई की जांच में करीब 20 आरोपितों के खिलाफ लगे फर्जी निवास और फर्जी जाति प्रमाण पत्रों के आरोप सही पाए गए हैं। सीबीआई ने परीक्षाओं में इंजन-बोगी और मुन्ना भाइयों के माध्यम से गड़बड़ी की जांच की थी। इस कारण सीबीआई ने फर्जी दस्तावेजों से प्रवेश पाने वाले 20 छात्रों के इस मामले को फिर से एसटीएफ भेज दिया है और जांच करने के लिए लिखा है। सूत्रों ने बताया कि एसटीएफ को यह पत्र मिल गया है। उच्च स्तर पर इसमें चर्चा चल रही है और विधिक सलाहकारों से भी राय ली जा रही है। अभी एसटीएफ ने इसमें जांच का फैसला नहीं लिया है। सीबीआई से हर छह महीने में रिपोर्ट आती है सीबीआई व्यापमं घोटाले को लेकर राज्य शासन को रिपोर्ट भेजती रहती है। इसमें सीबीआई द्वारा मामलों में हुई विवेचना का ब्योरा दिया जाता है। हाल ही में एक रिपोर्ट सीबीआई से मिली है जिसका परीक्षण किया जा रहा है। – अशोक अवस्थी, एडीजी, मप्र एसटीएफ

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