ग्वालियर
शहर में एयर पॉल्यूशन मानक से कहीं अधिक है। वातावरण में फेले धूल व धुएं के कण वायु को दूषित कर रहे हैं। यह हम नहीं प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के आंकड़े बता रहे हैं। इसके बाद भी प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड वायु प्रदूषण रोकने की दिशा में व्यापक कदम नहीं उठा रहा है। शहर में चलने वाले डीजल वाहनों से निकलने वाला काला धुआं और विकास कार्यों के चलते होने वाली खुदाई ने प्रदूषण के आंकड़ों को गति दी है। इसके साथ कचरा डंपिंग स्टेशनों से उठने वाला धुआं वातावरण में विषेली गैसों को बढ़ा रहा है। लेकिन खास बात यह है कि बोर्ड ने इस ओर से अपनी आंखों को बंद कर रखा है। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को यह उठता हुआ धुआं दिखाई नहीं देता। यही कारण है कि इस दिशा में आज तक कोई भी कदम उठाया ही नहीं गया।

तय मानक-
पीएम-10 का मान-100 और पीएम 2.5 का मान -60 होना चाहिए। इससे अधिक मात्रा में होना खतरनाक है।
मई माह में इस तरह बढ़े आंकड़े-
दिनांक पीएम-10 पीएम-2.5
2 मई 162.5 77.38
8 मई 176.1 60.24
9 मई 159.52 83.83
16मई 164.49 70.69
22मई 164.44 62.03
30मई 164.35 54.07
न मुझे शिकायत मिली और न मैंने कोई कदम उठाया-
कचरा प्रबंधन के लिए प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से परमिशन दी गई है। लेकिन कचरा स्टेशन कितने हैं और वहां पर आग लगने से धुआं उठता है इसकी कभी कोई शिकायत नहीं मिली। इसलिए इस दिशा में कोई कदम भी नहीं उठाया गया। यदि शिकायत मिलती है तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एनपी सिंह, क्षेत्रीय प्रबंधक, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड
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