ग्वालियर-
शहर में आ रहे गंदे पानी को लेकर हाईकोर्ट में बुधवार को याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि नगर निगम की लैब पर भरोसा नहीं है। इसलिए स्वतंत्र एजेंसी से रोजाना पानी के नमूनों की जांच कराई जाए। गंदे पानी की सप्लाई पर रोक लगाई जाए और नगर निगम जब तक पानी शुद्ध नहीं कर लेती है तब तक पीने के पानी की वैकल्पिक व्यवस्थाई की जाए। इस याचिका पर 27 मई को सुनवाई हो सकती है।

राजेन्द्र कुमार ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता राजू शर्मा ने तर्क दिया है कि संविधान के 74 वें संशोधन के तहत पानी राज्य का विषय हो गया है। राज्य सरकारों ने पानी की सप्लाई की जिम्मेदारी नगरीय निकायों को दी है, लेकिन ग्वालियर नगर निगम अपने नागरिकों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने में नाकाम रही है। पीला व सीवर युक्त पानी लोगों के घरों तक पहुंच रहा है। लोग बीमार हो रहे हैं। पीलिया, डायरिया, हैजा, उल्टी, दस्त व पेट में दर्द की शिकायत लोगों को बढ़ी है। नगर निगम गंदे पानी को लेकर गंभीर नहीं है। पानी की लाइनें सीवर की लाइन के साथ डाली गई हैं। जगह-जगह लाइनें टूट चुकी हैं। जब पानी की सप्लाई बंद होती है तो सीवर, मिट्टी सहित अन्य गंदी लाइन में चली जाती हैं। फिर से पानी की सप्लाई की जाती है तो गंदगी लोगों के घरों तक पहुंच जाती है। इसलिए लाइनों को दुरुस्त कराया जाए। प्रदूषित पानी की सप्लाई को रोका जाए।
भारत में हर साल एक लाख लोगों की मौत गंदा पानी पीने से हो रही
-याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि संयुक्त राष्ट्रसंघ ने भारत में पानी से होने वाली मौतों का आंकड़ा पेश किया था। हर साल एक लाख लोगों की मौत गंदा पानी पीने से हो रही है।
– 122 देशों के पानी का सर्वे किया गया था। भारत में पानी की शुद्धता में 120 वां नंबर है।
– सुप्रीम कोर्ट ने 1991 में जीने के अधिकार को परिभाषित किया है, जिसमें शुद्ध पानी व शुद्ध हवा पाने का अधिकार दिया गया है।
– शहर में लोग गंदे पानी को लेकर काफी चिंतित हैं। इसके चलते लोग पानी खरीदकर पीने लगे हैं।
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