ग्वालियर
भाजपाभगवा सुनामी में यूं तो तमाम दिग्गजों के टेंट-तम्बू उड़े, लेकिन ‘महल’सिंधिया राज परिवार उड़ जाएगा, इस बात का किसी को भरोसा नहीं था। हालात ये थे कि भाजपाई सियासतदा जब भी सीटों का गुणा-गणित निकालने बैठते तो कमलनाथ के छिंदवाड़ा और ज्योतिरादित्य सिंधिया की गुना-शिवपुरी सीट को हटाकर ही गिनती शुरू करते थे। हालात यह थे कि यहां मोदी लहर की बात करने वालों को कांग्रेसी तो दूर की बात, खुद भाजपाई शंका की नजर से देख रहे थे।
भाजपाइयों को अपनी जीत पर शंका और कांग्रेसियों को यहां से रिकार्ड जीत का भरोसा निराधार भी नहीं था, हालात ही यहां ऐसे थे। 20 अप्रैल को शिवपुरी में जब कांग्रेस प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया नामांकन दाखिल करने पहुंचे थे तो, गुना रोड से लेकर कलेक्ट्रेट तक सड़कों पर पैर रखने को जगह नहीं थी। लगभग 4 किमी के रोड शो में इतने स्वागत द्वार बनाए गए थे कि वे हर द्वार पर रुक कर स्वागत नहीं करवा पाए। मालाएं इतनी थीं कि आधी ही उनके वाहन की शोभा बढ़ा पाईं। नामांकन रोड शो के बाद हुई सभा में भी सुनने वाले इतने कि टैंट में नहीं समा रहे थे।
दूसरी ओर 22 अप्रैल को जब भाजपा प्रत्याशी डॉ.केपी यादव जब यहां पहुंचे तब उनके साथ चंद वाहनों में कुछ सौ लोग ही शामिल थे। सभा स्थल की स्थिति यह थी कि डॉ.केपी यादव जब यहां पहुंचे तो सुनने वाले लोग ही नहीं पहुंचे थे। मजबूरी में यादव ने पहले नामांकन भरा। सभा में लोगों के आने का इंतजार किया और जब लगा कि इज्जत बचाने लायक भीड़ जुट गई है तो सभा कर ली।
क्या करते रहे ‘सिंधिया’ के मंत्री
गुना-शिवपुरी क्षेत्र में प्रचार की कमान प्रदेश सरकार के उन मंत्रियों के हाथ थी, जो सिंधिया के खासमखास थे। , इमरती देवी प्रद्युम्न सिंह तोमरसहित तमाम कांग्रेसियों ने सिंधिया के नामांकन दाखिले से पहले ही गुना-शिवपुरी में जाकर मोर्चा संभाल लिया था। इसके अलावा प्रदेश सरकार में मंत्री बिजेन्द्र सिंह सिसोदिया, बाला बच्चन, गोविंद सिंह राजपूत, तुलसी सिलावट, प्रभुराम चौधरी पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रदीप जैन ने वहां पूरी दम लगाई।
स्टार प्रचारक भी बुलाए
लगभग दर्जनभर मंत्रियों की फौज के अलावा ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने संसदीय क्षेत्र में सचिन पायलट-आरोन, राजबब्बर-गुना, नवजोत सिंह सिद्घू-शिवपुरी को भी बुलाया।
कहां गए बड़बोले कांग्रेसी?
शिवपुरी में 20 अप्रैल को नामांकन सभा में कांग्रेसियों के बीच दावों की होड़ लग गई थी। पिछोर विधायक केपी सिंह ने तो यहां तक कह दिया कि ‘ हम तो महाराज से कह रहे हैं कि यहां तो महारानी प्रियदर्शिनी राजे को ही खड़ा कर दें, वे दूसरी सीट से खड़े होकर कांग्रेस का स्कोर बढ़ा दें। यहां तक कह दिया था कि सब विधायक अपने-अपने क्षेत्र में लीड दिलाने की चुनौती स्वीकार करें।
छह लाख से जीत का दावा
ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रचार में पहली बार उनकी धर्मपत्नी प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया शामिल हुई थीं। लगभग डेढ़ माह तक उन्होंने खूब प्रचार-प्रसार किया। शिवपुरी की एक सभा में उन्होंने यहां तक कह दिया था कि इस बार महाराज की जीत छह लाख से होनी चाहिए।
मोदी की सभा में नहीं आ पाए थे डॉ.यादव
भाजपा प्रत्याशी डॉ.केपी यादव के समर्थन में उप्र के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह, प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह, राजनाथ सिंह, जयाप्रदा की सभाएं हुई थीं। इतना ही नहीं जब ग्वालियर में पीएम मोदी की ग्वालियर में सभा हुई तो मुरैना, भिंड व ग्वालियर के प्रत्याशी तो आ गए थे, डॉ.केपी यादव नहीं आ सके थे। कारण यह कि उसी दिन गुना में राजनाथ सिंह की सभा थी।
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