ग्वालियर-
शहर में निजी एम्बुलेंसों का रेट सुनकर आप चौंक जाएंगे, क्योंकि यहां दर्द, संवेदना, मानवता से कोई लेनादेना नहीं है, यहां धंधा दर्द का है। शहर में निजी एम्बुलेंसों का एक किमी का रेट 200 रुपए है। यदि आपको चाहिए तो पैसा चुकाएं, वर्ना ऑटो से मरीज को ले जाएं। इसमें भी मरीज को ऑक्सीजन सुविधा हासिल नहीं है, यदि ऑक्सीजन सिलेंडर चाहिए तो आपको 200 रुपए अतिरिक्त चुकाने होंगे। जेएएच में एम्बुलेंस संचालकों की दादागिरी पर प्रबंधन भी अंकुश नहीं लगा पा रहा है।
दर्द का धंधाः गजब, शहर में निजी एम्बुलेंसो का रेट 200 रुपए प्रति किमी

झांसी रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती मरीज शिवदत्त पाराशर को जेएएच में शिफ्ट करने के लिए परिजन जेएएच में पहुंचे थे। यहां निजी एम्बुलेंस वाहन क्रमांक एमपी 07 डीए 0536 मारूति वैन के चालक से बात की तो उसने बताया कि बिना ऑक्सीजन के 400 रुपए लगेंगे। दिलचस्प बात ये है कि निजी अस्पताल और जेएएच के बीच की दूरी महज 2 किमी से अधिक नहीं है, इस हिसाब से एम्बुलेंस चालक करीब 200 रुपए किमी चार्ज कर रहे हैं। जबकि यदि आप निजी लग्जरी वाहन भी किराए पर लेते हैं तो वह 10 रुपए किमी में उपलब्ध हो जाता है। एम्बुलेंस संचालक लोगों की मजबूरी का फायदा उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इसी प्रकार जेएएच के एक डॉक्टर ने अपने भतीजे को जेएएच से थाटीपुर स्थित निजी अस्पताल में शिफ्ट कराया था। इसके एवज में एम्बुलेंस संचालक ने 700 रुपए वसूल किए थे। जेएएच में गरीब एवं मजबूर मरीज आते हैं, जिनको यह निजी एम्बुलेंस संचालक लूटने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं। कई बार जब लोगों के पास एम्बुलेंस का भाड़ा चुकाने के पैसे नहीं होते तो चंदा करके ले जाना पड़ता है।
डेडबॉडी तो तिगुना रेटः
जयारोग्य अस्पताल में जिंदा आदमी को एम्बुलेंस से ले जाना फिर भी सस्ता है, क्योंकि यदि डेडबॉडी हो या नाइट में मरीज को कहीं ले जाना हो तो रेट तिगुना हो जाता है। मतलब यदि रात में जेएएच से हॉस्पिटल रोड स्थित अस्पताल तक भी मरीज को ले जाना है तो उसकी एवज में आपको 500 रुपए चुकाने होंगे, जबकि दूरी आधा किमी भी नहीं है।
रजिस्ट्रेशन शुल्क तक नहीं चुकातेः
जेएएच में एम्बुलेंस प्वाइंट पर खड़ी 22 एम्बुलेंसों का करीब 5 साल पहले रजिस्ट्रेशन हुआ था। इनका 2500 मासिक शुल्क निर्धारित किया गया था। कुछ साल तो सबकुछ ठीक चला लेकिन फिर एम्बुलेंस संचालकों ने पैसा देना बंद कर दिया। जबकि यह लोग जेएएच कैम्पस में ही जगह का इस्तेमाल कर रहे हैं। वर्तमान में केवल 4 लोग ही रजिस्ट्रेशन शुल्क चुका रहे हैं। जेएएच ने पुलिस की भी मदद ली, लेकिन उनको भी इनकी दादागिरी के कारण चुपचाप वापस लौटना पड़ा। एम्बुलेंस संचालित करने वाले लोग राजनीतिक दलों से भी जुड़े हुए हैं।
रसीद कट्टों का सिस्टम नहीं चलने दियाः
गजराराजा मेडिकल कॉलेज ने पहले प्रीपेड बूथ बनाकर रसीद कट्टों का सिस्टम शुरू किया था। जिससे मनमाने किराए पर अंकुश लगाया जा सके। खास बात ये है कि इन एम्बुलेंस संचालकों ने इस सिस्टम को भी फ्लॉप कर दिया। कॉलेज या अस्पताल प्रबंधन इनके खिलाफ अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा सका है।
रात में मयखानाः रात में एम्बुलेंस प्वाइंट पर जमकर जाम छलकते हैं, सिक्युरिटी गार्ड यदि रोकते हैं तो लड़ाई झगड़े पर उतारू हो जाते हैं। जेएएच प्रबंधन इनकी शिकायत संभागायुक्त तक से कर चुका है, लेकिन कार्रवाई अब तक कुछ नहीं हुई है।
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