ग्वालियर,जीवाजी विश्वविद्यालय अधिकारियों-कर्मचारियों ने लापरवाही में तीन कॉलेजों के पांचवे सेमेस्टर के छात्रों की गलत अंकसूची बना डाली। जब एक छात्र ने कोर्ट में आवेदन किया तो हड़बड़ी में उसकी छठवे सेमेस्टर की भी गलत अंकसूची बना दी।
साइंस कॉलेज के बीसीए पंचम सेमेस्टर के छात्र हरेन्द्र सिंह ने 2016 में परीक्षा दी। इस परीक्षा में उसे पास भी कर दिया गया। इसी आधार पर उसने छठवें सेमेस्टर की भी परीक्षा दे दी। जब छात्र का परिणाम रुका तो पता चला कि विश्वविद्यालय ने लापरवाही में पांचवे सेमेस्टर की ही अंकसूची गलत बना दी थी। दरअसल जेयू ने साइंस कॉलेज समेत तीन अन्य कॉलेजों को पांचवे सेमेस्टर में जो अंकसूची जारी की थी, उसमें प्रेक्टिकल इन जावा के अंक ही नहीं थे। नियमानुसार जेयू को छात्रों को इस विषय में अनुपस्थित बताकर एटीकेटी की पात्रता देनी थी। उस समय किसी ने परीक्षा स्कीम पर ध्यान नहीं दिया और सभी छात्रों को पूर्णांक 550 में से अंक देकर पास या फेल कर दिया।
कोर्ट गया मामला तो छठवें की भी बना दी

छात्र हरेन्द्र ने इस मामले को कोर्ट में ले जाते हुए जेयू को नोटिस दिया तो गोपनीय विभाग ने हड़बड़ी में एक बार फिर गलती करते हुए पांचवे सेमेस्टर में पास दर्शाते हुए छठवे सेमेस्टर की अंकसूची बना दी। यहां गलती यह की, कि छात्र को जो 374 अंक 550 में से मिले थे, उन्हें ही 650 में से मिलना बता दिया।
ऐसे पकड़ में आया मामला
गोपनीय विभाग के चार्ट में करेक्शन व अंकसूची तैयार होने के बाद जब यह मामला परीक्षा विभाग में आया तो यहां शिक्षक अरुण कुमार शर्मा ने गलती को पकड़ लिया। उन्होंने जब मामला एआर अभयकांत मिश्रा के सामने रखा तो वह भी हैरान रह गए। उन्होंने तुरंत छठवें सेमेस्टर की अंकसूची निरस्त करवाई। अब इस मामले में सुनवाई होनी है।
तीनों कॉलेजों को भेजा था पत्र
मामले में एआर अभयकांत मिश्रा का कहना है कि पांचवे सेमेस्टर की अंकसूची में प्रेक्टिकल इन जावा विषय के अंक न होने की बात पकड़ में आते ही कॉलेजों से अंकसूची वापस मंगा ली गईं थीं। चूंकि इस विषय के अंक नहीं थे, इस कारण सभी को उस समय एटीकेटी की पात्रता दे दी थी।
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