ग्वालियर-
ग्वालियर शहर में सीवर, पानी की समस्या से मुक्ति और साफ सफाई के 3300 करोड़ से ज्यादा के अमृत, स्मार्ट सिटी और स्वच्छता के प्रोजेक्ट्स पर काम हो रहा है। कार्यों में मनमानी, लापरवाही और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। इन आरोपों की काफी हद तक सच्चाई बुधवार को यहां आए नगरीय आवास एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव संजय दुबे, आयुक्त गुलशन बामरा, इंजीनियर इन चीफ प्रभाकांत कटारे, स्मार्ट सिटी के अपर आयुक्त स्वतंत्र कुमार सिंह व अन्य अधिकारियों ने अपनी आंखों से देख ली।
सुबह 8 से दोपहर 3 बजे तक 7 घंटे के निरीक्षण में घटिया सड़क निर्माण पर निगम अधिकारियों को जमकर लताड़ा, लापरवाही तरीके से बिछाई जा रही पानी की लाइन उखाड़ने के निर्देश दिए तो स्मार्ट सिटी के कार्यों में मनमानी देख उनमें बदलाव की हिदायत दी। कचरा प्रबंधन का काम संभाल रही ईकोग्रीन कंपनी से कह दिया कि यदि 31 मई तक व्यवस्थाएं नहीं सुधारी तो सजा के लिए तैयार रहे। प्रमुख सचिव के तेवर देख निगम, स्मार्ट सिटी व अन्य प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों के होंठ सूख गए और हालात गिड़गिड़ाने जैसे बने रहे।
गिट्टी का पता न पानी है, क्या देख रहे हो
सभी अधिकारी डीडी नगर पहुंचे और सड़क व नाला निर्माण देखने खड़े हो गए। पीएस ने नगर निगम के अधीक्षण यंत्री प्रदीप चतुर्वेदी से पूछा कि सड़क निर्माण में कितने एमएम की गिट्टी लगाई जा रही है, पानी कब और कितना डाला जा रहा है, कॉम्पेशन कितना है। श्री चतुर्वेदी ठीक से कोई जबाव नहीं दे सके तो क्षेत्राधिकारी महेन्द्र अग्रवाल को बुलाया। सभी सवालों पर वे मौन रह गए। अधीक्षण यंत्री प्रेम पचौरी पीछे हट गए। यह हालात देख प्रमुख सचिव ने कहा कि आप काम कर रहे हो या मजाक। शर्म की बात है, आप अधिकारी हैं। क्या गाड़ियों में बैठकर ही निरीक्षण कर लेते हो। क्षेत्रीय लोगों ने जब घटिया निर्माण की बात कही तो ईएनसी श्री कटारे ने नाला से सीमेंट-गिट्टी हाथ से ही उखाड़कर निगम अधिकारियों से कहा कि अपनी आंखों से ही देख को भ्रष्टाचार के निर्माण का हाल। निगमायुक्त संदीप माकिन सहित अन्य अधिकारियों के गले सूख चुके थे और होंठ कांप रहे थे। इसी बीच सांड लड़ते हुए आए और आनन-फानन में अधिकारी गाड़ियों में बैठकर चले गए।
पानी की लाइन उखाड़ने के निर्देश
तिघरा से जलालपुर तक पानी की तीसरी लाइन बिछाई जा रही है। निरीक्षण अमला मोतीझील से होता हुआ तिघरा गांव के पास पहुंचा और पूछताछ शुरू की। अमृत योजना के तहत 42 करोड़ का यह काम झांसी की सीमेन्ट कांक्रीट उद्योग लिमिटेड नामक फर्म पर है। प्रमुख सचिव ने देखा कि पाइपों के नीचे बेस नहीं बनाया है। इस पर वे बिफर गए। ठेकेदार और निगम अधिकारी ठोस जबाव नहीं दे सके। जल प्रदाय के कार्यपालन यंत्री आरएन करैया पीछे हट गए तो नोडल अधिकारी आरएलएस मौर्य से सवाल-जबाव का सिलसिला शुरू हो गया। पीएस ने कहा कि निगम के जिम्मेदार अधिकारी कार्य का निरीक्षण ही नहीं कर रहे हैं तो यह गंभीर बात है। श्री मौर्य ने कहा कि गलती हुई है वे अब कसावट करेंगे। पीएस ने निर्देश दिए कि जितनी दूरी तक पाइपों के नीचे बेस नहीं बनाया है उतनी दूरी तक लाइन उखाड़कर फिर डालें। उन्होंने यह भी कहा कि ठेकेदार को भुगतान नहीं रोका जाना चाहिए। हां, काम पूरा होने पर वे स्वयं निरीक्षण करने आएंगे। हालांकि पीएस को एसटीपी, सीवर और पानी की लाइनों की खुदाई व रेस्टोरेशन कार्य का भी निरीक्षण करना था लेकिन वे खुदी सड़कें देखने नहीं पहुंचे।
मोतीझील फिल्टर प्लांट भी देखा
अधिकारी मोतीझील पहुंचे और वाटर फिल्टर प्लांट की जानकारी ली। श्री मौर्य ने पानी फिल्टर करने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। कलेक्टर अनुराग चौधरी ने सुधार के निर्देश दिए।
कचरे में मिट्टी या गिट्टी डालकर बजन बढ़ाया तो खैर नहीं
प्रमुख सचिव सबसे पहले सुबह सवा आठ बजे माधव नगर गेट पर पहुंचे और सफाई कर्मचारी से सवाल जबाव किए। फिर वे मेला ग्राउंड स्थित कचरा ट्रांसफर स्टेशन पहुंचे और ईकोग्रीन कंपनी के ढीले रवैये पर फटकार लगाई। कंपनी और निगम के कचरा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को साफ चेतावनी दी कि मनमानी और लापरवाही के कारण शहर बदनाम हुआ है। पिछले साल स्वच्छता रैंकिंग में ग्वालियर 28वें पायदान पर था और इस साल 31 पायदान लुढ़कर 59वें नंबर पर जा पहुंचा है। उन्होंने ईकोग्रीन के अधिकारियों को नसीहत देते हुए कहा कि आप पर 254 करोड़ के प्रोजेक्ट है। अभी शहर के 66 में से केवल 38 वार्डों से ही कचरा उठा सके हैं। शर्तों के तहत काम नहीं कर रहे। वे 31 मई तक काम पूरा कर लें। हां, कचरे का वजन बढ़ाने यदि गिट्टी, मिट्टी डाले तो खैर नहीं। 31 मई तक काम पूरा न होने पर सजा को तैयार रहें।
शहर स्मार्ट बना रहे हैं या पैसा ठिकाने लगा रहे हैं
स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्टस के तहत सबसे पहले वे कटोराताल थीम रोड पर पहुंचे और 24 करोड़ से सड़क संवारने का प्रोजेक्ट सुन अवाक रह गए। स्मार्ट सिटी सीईओ महिप तेजस्वी ने कहा कि विद्युत की एचटी लाइन को अंडरग्राउंड किया जाएगा, साइकिल ट्रैक भी बनाएंगे। पीएस श्री दुबे, आयुक्त श्री बामरा और ईएनसी श्री कटारे ने तमाम सवाल खड़े कर दिए। सीईओ श्री तेजस्वी ठोस जबाव नहीं दे सके। पीएस ने कहा कि आप शहर को स्मार्ट बना रहे हो या पैसा ठिकाने लगा रहे हो। बदलो इस प्रोजेक्ट को, जनता के लिए जो जरूरी है वह करो। लगभग यही स्थिति मोतीमहल में बन रहे कन्ट्रोल कमांड और महाराज बाड़ा पर टाउन हॉल की रही। दोनों भवन हेरिटेज की सूची में है। लेकिन स्मार्ट सिटी ने टाउन हॉल में प्लाईबोर्ड और कन्ट्रोल कमांड में बेतरतीव रूप से कांच और लकड़ी की बिडिंग लगा दी है। पीएस ने कहा कि आप एक ओर हेरिटेज बिल्डिगों को सहेज रहे हो और दूसरी ओर उनका वास्तवित स्वरूप बिगाड़ रहे हो, उखाड़े प्लाई और लकड़ी। सोच समझकर और जानकारी लेकर काम करो,मनमाने ढंग से नहीं। अधिकारियों ने स्मार्ट सिटी योजना के तहत किए जा रहे गोरखी स्काउट गाइड भवन को जीर्णोद्वार कार्य की तारीफ की। उल्लेखनीय है कि स्मार्ट सिटी के तहत 2250, अमृत योजना में 772 तथा कचरा प्रबंधन पर 254 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं।
आवास योजना की तारीफ
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विभिन्ना आय वर्गों के लिए मोतीझील पहाड़ी पर बनाए जा रहे आवासों की निगम में योजना के नोडल अधिकारी पवन सिंघल से अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी ली। पीएस व अन्य अधिकारियों ने ड्राइंग, डिजाइन व निर्माण कार्य पर प्रसन्नाता जताई।
इनका कहना है
अमृत और स्मार्ट सिटी योजना का काम काफी लेट हो रहे हैं। कुछ अन्य मुद्दों पर भी इन पर काम होना हैं। कुछ प्रोजेक्ट में संशोधन की जरूरत है। ईकोग्रीन कंपनी को चेतावनी दी है। सड़कों के रेस्टोरेशन व अन्य योजनाओं के कार्य में लापरवाही, मनमानी व भ्रष्टाचार के आरोप जैसे मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा।
संजय दुबे, प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास
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