ग्वालियर-बिजली कंपनी के भोपाल और ग्वालियर संभाग मेंडिवीजन और जाेन में नया अधिकारी कौन सा आया? इसकी जानकारी उपभोक्ताओं को नहीं मिल पा रही है। जब वे अपनी शिकायत लेकर संबंधित डिवीजन या जोन पर पहुंचने हैं तो वहां मौजूद कर्मचारी भी उनकी मदद नहीं करते हैं। ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं को अपनी फरियाद सुनाने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में जिस अधिकारी का ट्रांसफर होता था, उसके स्थान पर किस अधिकारी ने ज्वाइन किया, यह आदेश तत्काल वेब पोर्टल पर अपलोड करने का नियम है।
बिजली कंपनी ने 31 दिसम्बर तक इस नियम का पालन भी किया। इस दौरान संबंधित अधिकारी का ज्वाइन करने के बाद उसका मोबाइल नंबर भी सूची में अपडेट कर दिया जाता था। लेकिन सरकार बदलने के बाद कंपनी ने थोक में तबादले कर दिए। इस वजह से कंपनी में अफरा-तफरी का माहौल है। सूत्रों की मानें तो इस घटनाक्रम को छुपाने के लिए कंपनी ने ट्रांसफर आदेश अपलोड करना बंद कर दिए हैं। 31 दिसम्बर 2018 में चार जीएम के ट्रांसफर आदेश के बाद पोर्टल पर कोई आदेश अपलोड नहीं किया गया है। इससे जाहिर है कि राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण ही बड़े पैमाने पर हुए तबादले हुए हैं। इन्हें छिपाने के उद्देश्य से ही तबादला आदेश पोर्टल पर अपलोड नहीं किए गए हैं, जिसका खामियाता उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।
जांच करा रहे हैं
 महाप्रबंधकों को अपने सर्किल की जानकारी अपडेट करने के निर्देश दिए जा चुके हैं, अगर फिर भी अपडेट नहीं हो रहे हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। बिलों में नंबर न आने के मामले में जांच करा रहे हैं। डॉ.संजय गोयल, प्रबंध संचालक, मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी
कनिष्ठ पा गए प्रभार
कंपनी द्वारा किए गए तबादलों से कुछ कनिष्ठ अफसरों को फायदा हुआ है। प्रबंधन ने इन्हें उपकृत करने के लिए उच्च पद का प्रभार सौंप दिया है। इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों को विभिन्न कार्यालयों में शिफ्ट किया गया है। इस मुद्दे को लेकर कुछ अधिकारी कोर्ट की शरण में जाने की तैयारी कर रहे हैं। तबादलों में गड़बड़ी की शिकायतें मुख्यमंत्री तक की जा रही है। अब देखना यह है कि इन नियम विरुद्ध तबादलों को लेकर लोकसभा चुनाव के बाद क्या कार्रवाई होती है?

शिकायत दर्ज करा दी है
 पोर्टल पर आदेश अपलोड न करना बिजली कंपनी की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े करता है। ऊर्जा मंत्री को हमने शिकायत दर्ज करा दी है। यह मामला सीधे ताैर पर भ्रष्टाचार से जुड़ा प्रतीत होता है। दलवीर सिंह, विद्युत विशेषज्ञ
अब तक नंबर संशोधित नहीं हुए
 हमारे बिल में अधिकारियों के नंबर गलत अंकित हुए आ रहे हैं। इस मामले में हमने बिजली कंपनी के उच्च अधिकारियों को शिकायत की है। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इस माह के बिल में भी नंबर संशोधित नहीं किए गए हैं। इस वजह से मेरे जैसे कई उपभोक्ताओं को बिजली संबंधी समस्या का निराकरण कराने में परेशानी आ रही है। विवेक राठी, रहवासी चूनाभट्टी कोलार रोड
इसलिए जरूरी जानकारी
करोड़ों उपभोक्ताओं से सीधी जुड़ी होने के कारण बिजली कंपनी का यह कार्य अति आवश्यक सेवा की श्रेेणी में आता है। आम जन अपनी विभिन्न शिकायतों जैसे लाइन में फॉल्ट, करंट आना, अाग लगना, ट्रांंसफर खराब होना सहित सभी समस्याओं के निराकरण के लिए पहले डिवीजन या जोन में जाकर कर्मचारीयों को अवगत कराता है। फिर भी समस्या का निराकरण न होने पर जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क करता है। मसलन भोपाल के कोलार क्षेत्र में उपभोक्ताओं की सबसे ज्यादा शिकायतें आती हैं। अगर यहां का सहायक यंत्री उपभोक्ताओं की शिकायत को नहीं सुनता है तो वह सीधे उप महाप्रबंधक को फोन कर शिकायत कर सकते हैं।
बिलों में नहीं नंबर
भोपाल और ग्वालियर संभाग में उपभोक्ताओं के पास हर महीने जो बिल भेजे जाते हैं, उस पर संबंधित जोन के अधिकारी का नंबर लिखना जरूरी है। लेकिन 80 प्रतिशत बिलों पर नंबर प्रकाशित नहीं हो रहे हैं। कुछ फीडर्स पर बंटने वाले बिलों में नंबर आ रहे हैं, लेकिन अधिकारी बदल चुके हैं। जब कोई उपभोक्ता फोन करता है तो उधर से जवाब मिलता है कि उसका ट्रांसफर हो चुका है। हाल में बिजली कंपनी ने टोल फ्री नंबर 1912 जारी किया है। लेकिन कई बार इन नंबर पर जब भोपाल या ग्वालियर से फोन किया जाता है तो वह इन्दौर या जबलपुर लग जाता है।
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