ग्वालियर। गैर इरादतन हत्या के मामले में आरोपी के खिलाफ पुलिस की लापरवाही तथा समय पर चालान पेश नहीं किए जाने पर अदालत ने आरोपी गिर्राज भार्गव को तो जमानत पर रिहा किए जाने के आदेश दिए वहीं आदेश की प्रतिलिपि एसपी को भेजते हुए यह निर्देश दिया है कि इस मामले में विधिवत जांच कर दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई करते हुए 15 दिन में अपनी जांच रिपोर्ट पेश करें।
विशेष न्यायाधीश रविन्दर सिंह ने अपने आदेश में कहा कि लापरवाही के कारण आरोपी को डिफाल्ट बेल प्राप्त हुई है। एसपी को जांच में यह बताना होगा कि किन परिस्थितियों में और किस पुलिस अधिकारी अथवा कर्मचारी की त्रुटि के कारण अथवा जानबूझकर की गई त्रुटि के कारण समय सीमा में चालान पेश नहीं किया जा सका। गिर्राज भार्गव द्वारा जमानत का पहला आवेदन न्यायालय में दिया गया था तब उसके खिलाफ 14 मामले दर्ज होने के कारण उसके आवेदन को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद आरोपी ने दूसरा आवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि उसके खिलाफ झूठी रिपोर्ट के आधार पर गैरइरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस को 60 दिन में जांच कर चालान पेश कर देना चाहिए था जो नहीं किया गया इसलिए उसे जमानत पर रिहा किया जाए। वह 10 अक्टूबर 2018 से जेल में है। न्यायालय ने दूसरे आवेदन को स्वीकार करते हुए चालान विलंब से पेश करने के कारण डबरा के थाना प्रभारी को स्पष्टीकरण के साथ तलब किया था जिस पर थाना प्रभारी अभय प्रताप सिंह केस डायरी मय चालान व स्पष्टीकरण के न्यायालय में हाजिर हुए। उनकी ओर से कहा गया कि उन्होंने 4 जनवरी 19 को ही डबरा थाने का प्रभार ग्रहण किया है। इससे पूर्व थाना प्रभारी राकेश गुप्ता थे। इस मामले की केस डायरी उन्हें चार्ज में प्राप्त नहीं हुई थी। जो पूर्व से ही विवेचक एसआई रामेश्वर कौशल के पास थी, जिसके बारे में उन्हें संज्ञान नहीं था। चालान समय पर पेश नहीं किए जाने पर रामेश्वर कौशल और आरक्षकगण को अलग से स्पष्टीकरण दिया गया है। न्यायालय में थाना प्रभारी द्वारा गुरुवार को अदालत में चालान पेश कर दिया गया।
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