ग्वालियर। अपनी पत्नी की हत्या के अपराध में 13 साल से केन्द्रीय जेल में सजा भुगत रहे पति और उसके भाई को उच्च न्यायालय ने बरी कर दिया। उच्च न्यायालय ने माना कि हत्या के इस मामले में अभियोजन एवं अनुसंधान सही तरीके से नहीं किया गया है। सभी सबूत अदालत के सामने नहीं लाए गए। इस कारण निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही न्यायालय ने दोनों आरोपियों को तत्काल जेल से रिहा किए जाने के आदेश दिए हैं।
न्यायमूर्ति संजय यादव एवं न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की युगलपीठ ने दोनों की अपील को स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया है। निचली अदालत ने साक्ष्य के आधार पर पति दिनेश और उसके भाई को मृतिका की हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। दोनों आरोपी 27 जून 2006 से जेल में सजा भुगत रहे हैं। इस सजा के खिलाफ दोनों ने एडवोकेट रवीन्द्र दीक्षित के माध्यम से अपील प्रस्तुत की। दीक्षित ने अपनी दलील में कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित इस मामले में अभियोजन द्वारा इस मामले में न्यायालय में न तो फिंगर प्रिंट की रिपोर्ट, न एफएसएल रिपोर्ट प्रस्तुत की। इतना ही नहीं मुख्य गवाह पुनियाबाई एवं मृतिका का बेटा जो कि आरेापीगण व मृतिका के साथ अंतिम बार गया था उन दोनों की गवाही न्यायालय के सामने नहीं कराई गई। जब्ती और गिरफ्तारी की कार्यवाही भी गवाह ने गलत बताई। मृतिका के भाई के बयान को भी संदेहास्पद माना गया क्योंकि उसके भाई ने फर्जी वसीयत के द्वारा उस मकान को हड़पने के लिए तहसीलदार के समक्ष कार्यवाही की थी, इस मामले की कोई जांच ही नहीं की गई। इन सभी बिंदुओं से सहमति जताते हुए न्यायालय ने आरोपीगण को दोषमुक्त कर दिया।
13 साल की सजा भुगतने के बाद पति व देवर को हाईकोर्ट ने बताया बेगुनाह
अदालत ने कहा कि जांच में थी कई कमियां, सभी सबूत भी पेश नहीं किए गए थे, दोनों को तत्काल रिहा करने के आदेश
पुलिस ने नहीं जुटाए थे सबूत
प्रकरण के तथ्य इस प्रकार है कि डबरा थाने में मृतिका बेबी के भाई श्रीनिवास ने 2 जून 2006 को सूचना दी कि उसकी बहन को उसके जीजा दिनेश एवं उसके भाई भगवती घर से भांजे के साथ यह कहकर ले गए हैं कि मकान में लिपाई पुताई करवानी है एवं कन्या पूजन करना है। किंतु जब बहन देर शाम तक नहीं लौटी और उसका दूसरा छोटा बच्चा रोने लगा तो वह उस बच्चे को उसके ससुराल देने गया, किंतु घर पर बाहर से ताला लगा देखा तब वह उसे देखने पास में रहने वाली दूसरी बहन के घर गया किंतु जब वह उधर भी नहीं मिली तब उसे देखने दुबारा वापस घर आया तो दरवाजे के बगल से खिडक़ी से कमरे के अंदर देखा तो उसकी बहन फांसी पर लटकी मिली। पुलिस तथा एफएसएल टीम ने मौके पर पहुंचकर अंगुलियों के निशान लिए तथा अन्य तथ्य एकत्र किए। पुलिस ने ताला तुड़वाया और मौके पर लोगों के बयान लिए तब वहां मृतिका की मां व भाई ने बताया कि आरोपी दिनेश एवं उसका देवर भगवती रुपयों के लिए उसके साथ मारपीट करते हैं। इसलिए वह मायके में रहने लगी थी। मृतिका की मां ने वह मकान मृतिका के नाम से खरीदा था। मृतका का पति दिनेश और उसका देवर पर यह आरोप लगाया था कि वे इस मकान को बेचने के लिए मृतका पर दबाव डाल रहे थे जिससे कि वे पैसों को हड़प कर सकें। जबकि यह तथ्य भी सामने आया था कि मृतका के भाई ने मृतिका के मकान की फर्जी वसीयत तैयार कर तहसीलदार के यहां जो कार्यवाही की थी उस संबंध में कोई जांच रिपोर्ट नहीं आई। इस कारण मृतका के भाई का बयान संदिग्ध माना गया था।
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