ग्वालियर- जीवाजी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के भाई प्रो.आनंद मिश्रा 19 फरवरी तक ही जीवाजी विश्वविद्यालय में आवंटित बंगले में रह सकेंगे। जेयू प्रशासन ने उन्हें सीधे तौर पर बंगला खाली करने नोटिस तो नहीं दिया है, लेकिन महीने भर पहले आए उनके पत्र के जवाब में उन्हें सिर्फ दो माह रहने की अनुमति प्रदान की है। यह अवधि 19 फरवरी को पूरी हो रही है।

विदित है कि उच्च शिक्षा विभाग ने 19 दिसम्बर को जारी एक आदेश के जरिए प्रो.आनंद मिश्रा की प्रतिनियुक्ति सेवाएं खत्म कर दी थी। उन्हें पहले सहरई जिला अशोक नगर भेजा गया। उसके बाद 22 दिसम्बर को जारी एक आदेश के जरिए उनका स्थानांतरण तेंदुखेड़ा जिला दमोह में कर दिया गया। इस स्थानांतरण आदेश के कुछ दिनों बाद ही जेयू कुलसचिव प्रो.आनंद मिश्रा ने जेयू प्रशासन को एक पत्र लिखकर नियमानुसार जीवाजी विश्वविद्यालय द्वारा आवंटित बंगले में रहने की अनुमति मांगी थी। जेयू भेजे गए उनके इस पत्र पर अधिकारियों ने गौर नहीं किया था।
पूर्व विधायक ने उठाई थी आपत्ति

दतिया के पूर्व विधायक राजेन्द्र भारती ने इस मामले में 30 जनवरी को जीवाजी विश्वविद्यालय कुलपति के नाम एक पत्र भेजा था। आपत्ति उठाई थी कि प्रो.मिश्रा स्थानांतरण के बाद भी जेयू के बंगले में कैसे रह रहे हैं? उन्होंने प्रो.मिश्रा पर यहां रहते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन के कामों में हस्तक्षेप के भी आरोप लगाए थे। चेतावनी दी थी कि, यदि प्रो.मिश्रा से बंगला खाली नहीं कराया गया तो कांग्रेस आंदोलन करेगी।
ऐसे निकाला तोड़
प्रदेश में बदले सत्ता के समीकरण के बीच जेयू प्रशासन ने भी इस मामले में एक नया तोड़ निकाला। सीधे-सीधे बंगला खाली करने का नोटिस न देकर प्रो.मिश्रा के पत्र के जवाब में अनुमति ही 19 फरवरी की दे दी। खास बात यह है कि ट्रांसफर के बाद आवास खाली करने के दो तरह के नियम है। एक नियम में 2 माह की अनुमति दी जाती है तो दूसरे में 6 माह तक की। जेयू प्रशासन ने 2 माह की अनुमति देकर इस मामले से अपना पल्ला झाड़ लिया है।
राजनीतिक प्रतिद्वंदता
खास बात यह है कि कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेन्द्र भारती और पूर्व मंत्री व विधायक नरोत्तम मिश्रा का कार्यक्षेत्र दतिया है। दोनों के बीच लंबे समय से राजनीतिक प्रतिद्वंदता चल रही है। प्रदेश में राजनीतिक समीकरण बदलने के तुरंत बाद नरोत्तम मिश्रा के बड़े भाई को प्रो.आनंद मिश्रा को कुलसचिव पद से हटाने के पीछे भी इसी राजनीतिक प्रतिद्वंदता को कारण माना जा रहा है।
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