ग्वालियर- श्योपुर जिला आईएएस अफसरों के लिए कलेक्टरी का तजुर्बा देने वाली प्रयोगशाला बन गया है। यह हम नहीं कह रहे बल्कि, जिले में पदस्थ हुए कलेक्टरों की सूची यही बता रही है। कांग्रेस हो या भाजपा, हर सरकार ने श्योपुर में ऐसे आईएएस भेजे, जिन्हें पहले से कलेक्टरी का कोई अनुभव नहीं था।
1998 में श्योपुर को जिला बनाया गया। इन 20 सालों में श्योपुर में 18 कलेक्टर बदल दिए गए हैं। जानकर आश्चर्य होगा कि इन 18 में से 17 आईएएस ऐसे थे, जो पहली बार कलेक्टर की कुर्सी पर श्योपुर में आकर ही बैठे। केवल एक आईएएस धनंजय सिंह भदौरिया ऐस थे, जिन्हें पूर्व में कलेक्टरी का अनुभव था। भदौरिया पोस्टिंग से पहले पन्ना जिले के कलेक्टर रह चुके थे। श्योपुर के 18वें कलेक्टर के तौर पर बसंत कुर्रे ने आमद दी है। श्री कुर्रे भी ऐसे आईएएस हैं, जिन्हें कलेक्टरी का कोई अनुभव नहीं, वह भी जीवन की पहली कलेक्टरी श्योपुर में करेंगे।
श्योपुर से हटकर सचिवालय गए अधिकांश
दूसरी खास बात यह है कि श्योपुर के अधिकांश कलेक्टरों का अनुभव अच्छा नहीं रहा। 20 साल में जितने भी कलेक्टर श्योपुर से हटाए गए हैं उनमें से अधिकांश को सचिवालय में अटैच कर दिया। बहुत कम ही ऐसे कलेक्टर हैं जिन्हें श्योपुर से हटने के बाद किसी दूसरे जिले की कलेक्टरी मिली हो।
निवर्तमान कलेक्टर सौरभ कुमार सुमन भी सचिवालय भेजे गए हैं। इससे पहले पीएल सोलंकी, डीएस भदौरिया, अभिजीत अग्रवाल, ज्ञानेश्वर बी पाटील को भी सचिवालय में पदस्थ कर दिया गया। एसएन रूपला के अलावा एक-दो आईएएस और हैं जिन्हें श्योपुर से हटाकर किसी दूसरे जिले का कलेक्टर बनाया गया हो।
18 में से 7 फ्रेश और 11 प्रमोटी आईएएस मिले
20 साल 08 महीने का हो चुके श्योपुर जिले में कुल 18 कलेक्टर (पीएल सोलंकी दो बार) पदस्थ हुए हैं। इन 18 में से केवल 07 कलेक्टर ऐसे हैं, जो फ्रेश आईएएस थे। बाकी के 11 कलेक्टर ऐसे पदस्थ हुए हैं, जो राज्य प्रशासनिक सेवा से प्रमोशन होकर आईएएस बनाए गए हैं। इन्हें प्रमोटी आईएएस कहा जाता है। नवागत कलेक्टर बसंत कुर्रे भी प्रमोटी आईएएस हैं।
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