
16 मई। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य परिषद सदस्य संजय नामदेव ने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सूर्यकांत द्वारा बेरोजगार युवाओं, आरटीआई कार्यकर्ताओं, एक्टिविस्टों और पत्रकारों को लेकर की गई टिप्पणी की कड़ी निंदा की है।शनिवार को जारी बयान में उन्होंने कहा कि देश में उच्च शिक्षित युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है। ऐसे में जो युवा विभिन्न संगठनों से जुड़कर सरकार की नीतियों का विरोध करते हैं, उन्हें “काकरोच” और “परजीवी” कहना युवाओं का उपहास उड़ाने जैसा है।उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगार युवाओं को कभी पकौड़े तलने, कभी पान की दुकान लगाने, तो कभी पंचर बनाने अथवा भीख मांगने जैसी सलाह रोजगार के विकल्प के रूप में दी जा रही है। इसी कड़ी में न्यायमूर्ति की टिप्पणी बेरोजगार युवाओं को आहत करने वाली है।संजय नामदेव ने कहा कि यदि सत्ता के खिलाफ आवाज उठाने वालों को “परजीवी” कहा जाएगा, तो स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वकालत छोड़कर संघर्ष करने वाले महात्मा गांधी, लोकमान्य तिलक और जवाहर लाल नेहरू जैसे नेताओं को भी उसी श्रेणी में रखना पड़ेगा।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने वालों को “आंदोलनजीवी” कहकर बदनाम किया जा रहा है। भाकपा नेता ने कहा कि इस प्रकार की टिप्पणी देश में बढ़ती बेरोजगारी को लेकर सरकार की विफलताओं को छिपाने का प्रयास है।भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जिला परिषद जबलपुर की ओर से उक्त टिप्पणी की तीव्र भर्त्सना और निंदा की गई है।
बढ़ता कारवाँ | समाजवाद की ओर बढ़ते कदम… India's #1 Leading News Portal